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एक माह बाद खुले स्कूल और कॉलेज, पहुंचे छात्र, लौटी रौनक

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आर्यकन्या डिग्री कालेज में धूप का आनंद लेती छात्राएं - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। शासन के निर्देश पर सोमवार से माध्यमिक और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो गई। पहले चरण में कक्षा नौ से 12 एवं स्नातक व परास्नातक कक्षाओं में पठन-पाठन की अनुमति दी गई है। पहले दिन छात्र-छात्राओं की उपस्थित 40 से 60 फीसद ही रही। विद्यालयों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर शिक्षण कार्य हुआ। करीब एक माह बाद सोमवार को छात्र-छात्राओं के पहुंचने से स्कूल, कॉलेजों में रौनक आ गई।
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घने कोहरे के बीच छात्र-छात्राएं सोमवार सुबह स्कूल और कॉलेज पहुंचे। विद्यालयों में थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ सैनिटाइज कराते हुए प्रवेश दिया गया। शिक्षण कार्य के दौरान कक्षाओं में भी छात्रों को मुंह पर मास्क लगाकर और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बैठाया गया। काफी दिन बाद स्कूल, कॉलेज पहुंचने विद्यार्थियों के चेहरे भी खिले दिखाई दिए।
एक जनवरी से बंद थे स्कूल और कॉलेज
कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमितों की संख्या बढ़ने पर योगी सरकार ने एक जनवरी को स्कूल और कॉलेेज बंद करने के निर्देश दिए थे। एक से 12 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया और इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने के निर्देश दिए। वहीं 13 जनवरी से शिक्षकों को रोस्टर अनुसार स्कूल आने के आदेश जारी किए।
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सरकारी में 40 और निजी स्कूल में 60 प्रतिशत रही उपस्थिति
एक महीने बाद खुले स्कूलों में सिर्फ नौवीं से 12वीं एवं डिग्री कॉलेजों के छात्रों को ही आने की छूट मिली है। पहले दिन राजकीय स्कूलों में जहां 40 फीसदी तो वहीं निजी 60 फीसद छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। डिग्री कॉलेजों में टीकाकरण कराने वाले छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश की अनुमति मिली।
छात्राएं बोली- स्कूल खोलने का निर्णय उचित
सनातन धर्म बालिका इंटर कॉलेज की कक्षा नौ की छात्रा नंदिनी वर्मा ने स्कूल खुलने का निर्णय उचित है। विद्यालय बंद होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। क्लास रूम की पढ़ाई का विकल्प ऑनलाइन शिक्षण कार्य कभी नहीं बन सकता।
सनातन धर्म बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा श्रेयशी त्रिवेदी का कहना है कि कोरोना संक्रमण ने सबसे अधिक पठन पाठन को प्रभावित किया है। पिछले दो साल से पढ़ाई ही नहीं हो पा रही थी। पढ़ाई का सबसे अच्छा माध्यम स्कूल ही है।
आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की एमए संस्कृत की छात्रा साधना रस्तोगी बताती हैं कि घर पर पढ़ाई नहीं बन पाती, क्योंकि कॉलेज में इसका माहौल होता है। वैक्सीनेशन कराकर प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। फिर किस बात का डर।
आर्यकन्या महाविद्यालय की एमए हिंदी साहित्य की छात्रा पिंकी ने बताया कि दोनों टीके लगवा लिए हैं। पढ़ाई चौपट हो रही थी। इसलिए कॉलेज का खुलना बेहद जरूरी था। सरकार का निर्णय उचित है।
श्रीराजेंद्र गिरि मेमोरियल एकेडमी की छात्रा कोमलप्रीत कौर ने बताया कि कोरोना के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इधर, कोरोना की रफ्तार भी कम हो गई है। इसलिए कॉलेज खुलना जरूरी था। कॉलेज में पढ़ाई का जो माहौल मिलता है, वह ऑनलाइन में संभव ही नहीं है।
प्रधानाचार्यों ने कहा...
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऑनलाइन शिक्षा प्रभावी नहीं है। सबसे ज्यादा करोना का प्रभाव छात्रों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मस्तिष्क सहित सीखने की क्रिया पर पड़ा। बच्चों के भविष्य को देखते हुए विद्यालय खुलना बेहद जरूरी था। -आलोक मिश्रा प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र मेमोरियल अकैडमी
कक्षा में बैठकर शिक्षक के सामने विचार मंथन करके जो विलक्षणता बच्चे में आती है वह घर बैठकर कभी नहीं आ सकती। उचित होगा कि सरकार जूनियर सेक्शन भी खोलने की अनुमति दे। वैसे भी दो साल में पठन पाठन कार्य बेहद खराब दौर से गुजर रहा है। - अजय कृष्ण आंनद, प्रधानाचार्य चिल्ड्रंस अकैडमी गोला
कोविड नियमों का पालन कर शिक्षण कार्य शुरू कराया गया। पंजीकृत 722 छात्राओं में से 700 के वैक्सीन लग चुकी है। टीकाकरण से वहीं वंचित हैं, जिनकी आयु निर्धारित उम्र से कम है। प्री बोर्ड में टीकाकरण कार्ड की छाया प्रति साथ लेकर आने वाली छात्राओं को ही बैठने की अनुमति होगी। -शिप्रा बाजपेई, प्रधानाचार्य सनातन धर्म बालिका इंटर कॉलेज
मैलानी में पहले दिन 35 बच्चे पहुंचे स्कूल
मैलानी। सोमवार से कक्षा नौ से 12 तक और इससे ऊपर के छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल-कॉलेज खुले। यहां स्थित एकमात्र श्री लाल बहादुर शास्त्री इंटर कालेज के प्रधानाचार्य जगदंबा प्रसाद वर्मा ने बताया कि पहले दिन विद्यालय में कक्षा नौ से 12 तक के मात्र 35 बच्चे स्कूल पहुंचे। उन्होंने बताया कि शासन निर्देशानुसार स्कूल आए बच्चों की थर्मल स्कैनिंग कर मास्क सहित उन्हें विद्यालय में प्रवेश करने दिया गया। संवाद
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