लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क के गैंडों को आनुवंशिक दोषों से बचाने के लिए उनके लिए नया घर बनाने के साथ ही असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से से नौ गैंडे लाए जा रहे हैं। गैंडों के नए घर के लिए पार्क के बेलरायां रेंज के छंगा नाला के पास 14 वर्ग किलोमीटर जगह चुन ली गई है।
पार्क में 1984 में शुरू हुई गैंडा पुनर्वास परियोजना के तहत यहां गैंडों की आबादी 31 हो गई है। इसके चलते अब तक दुधवा पार्क के सलूकापुर रेंज में रहने वाले गैंडों के लिए आरक्षित 27 वर्ग किलोमीटर की जगह कम पड़ने लगी है। सीमित जगह में एक साथ रहने से उनमें अंत:प्रजनन भी हो रहा है। अभी तक दुधवा के गैंडा परिवार की अधिकतर संतानें असम से लाए गए नर गैंडा बांके की हैं। एक ही गैंडे से चार पीढ़ियों का प्रजनन होने से दुधवा के गैंडों में आनुवंशिक दोषों का खतरा पैदा हो गया है। वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का मानना है कि आनुवंशिक दोषों के कारण गैंडों की नस्ल कमजोर हो रही है।
इस लिहाज से पार्क के उप निदेशक बीके सिंह चार-पांच नवंबर को गुवाहाटी में थे। वहां उन्होंने काजीरंगा पार्क प्रशासन से तीन नर और छह मादा गैंडे मांगे। बैठक में सैद्धांतिक सहमति के असम के वन मंत्री ने भी इसकी मंजूरी दे दी है।
.....उतार-चढ़ाव भरी रही पुनर्वास योजना
गैंडों को अपने पुरखों की धरती दुधवा में फिर से पुनर्वासित करने के पहले चरण में असम से तीन मादा और दो नर गैंडे लाए गए थे। इनमें दो मादा गर्भवती थीं। लंबी हवाई और सड़क यात्रा के चलते एक ही साल में दोनाें गर्भवती मादा गैंडों की मौत हो गई। बाद में नेपाल से 16 हाथियों के बदले चार मादा गैंडा हिमरानी, नारायणी, स्वयंवरा और राप्ती मंगाई गई। इसके बाद गैंडों की वंशवृद्धि शुरू हुई।