रामनगर बगहा में किसानों के खेत फसलों समेत निगलती जा रही घाघरा नदी इसी गांव के मजरा गोडियाना का वजूद मिटाने पर तुली है। बीते वर्ष के कटान को मिलाकर घाघरा ने करीब 80 घर निगल लिए हैं। इस साल अब तक 12 घर नदी में समा चुके हैं। गांव में अब महज तीन घर बचे हैं वह भी खुद घर उजाड़ रहे हैं। इसके अलावा ईसानगर में घाघरा नदी साहबदीन पुरवा कुंजापुरवा, पोखरा, जनकपुर आदि दर्जनों गांवों में तेजी से भू कटान कर रही है।
रमियाबेहड़ ब्लाक के रामनगर बगहा में नदी की तेज धार गांव की कृषि योग्य भूमि फसलों सहित निगल रही है। इसके मजरा गांव गोडिय़ाना का वजूद समाप्त होने के कगार पर है। घाघरा ने इस गांव में बीते वर्ष कल्लूराम का घर काट कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे और देखते देखते गांव के करीब 70 परिवारों के घरों को निगल कर उन्हें सड़क पर ला दिया था। इस वर्ष भी घाघरा ने गांव के दस घर निगल लिए हैं अब गांव का वजूद समाप्त करने के लिए घाघरा को सिर्फ अशर्फी लाल, रामलखन और सुंदर लाल के घर बचे हैं। यह घर भी घाघरा की जद में आ चुके हैं।
रामनगर बगहा में प्रधान ने रुकवाया बचाव कार्य
रामनगर बगहा गांव में घाघरा नदी की तेज धार से हो रहे भू कटान रोकने की कवायद कर रहे बाढ़ खंड विभाग का काम ग्राम प्रधान ने बंद करा दिया। नतीजन जो बंबू कैरेट और बोरियां अबतक विभाग ने लगायी थीं वह नदी की तेज धारा में बहती जा रही हैं। बाढ़ खंड के अधिकारियों की मानें तो जहां काम हो रहा था प्रधान उससे अलग कुछ दूरी पर काम कराना चाहते थे जबकि विभाग के इंजीनियर घाघरा की धारा मोड़ने का प्रयास कर रहे थे। बाढ़ खंड विभाग जहां भू कटान हो रहा था वहां पर बंबू कैरेट और बोरियां लगा कर कटान रोकने का प्रयास कर रहा था यह काम बगहा गांव के पश्चिम भाग में चल रहा था। पानी का स्तर कम हुआ तो कटान बगहा गांव के पूरब तेजी से होने लगा। तब ग्राम प्रधान सरस्वती देवी के पति श्रवण भार्गव ने बाढ़ खंड के इंजीनियरों से यह कहा यहां काम बंद कर पूरब जहां गांव की तरफ कटान हो रहा है काम शुरू कराया जाए। विभाग ने पानी कम होने का हवाला देकर पश्चिम तरफ का बचाव कार्य भी बंद करा दिया। प्रधानपति श्रवण कुमार भार्गव ने बताया कि काम मैंने बंद नहीं कराया विभाग ने खुद बंद कर दिया। गांव में पूरब तरफ ज्यादा कटान हो रहा था इसको रोकने के लिए कहा था। यदि गांव के पश्चिम से पूरब तक काम हो तो गांव के अलावा हजारों एकड़ जमीन भी बच सकती है पर विभाग करना नहीं चाहता।
बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता बीके सिंह कहते हैं कि पहले नदी का जलस्तर डेढ़ लाख क्यूसेक था अब घटकर मात्र 75 हजार क्यूसेक रह गया है इस लिए काम बंद करा दिया था। यदि कटान फिर भी हो रहा है, तो दिखवाता हूं ।