बंधक भूमि का हो गया दाखिल खारिज, हड़कंप
निघासन। बैंक के कर्ज में डूबी गांव दुर्गापुरवा की जमीन का किसी दलाल ने भूमि बंधक मुक्त दिखाकर दाखिल खारिज करा लिया। मामले की जानकारी तहसीलदार को हुई तो उन्होंने बैंक मैनेजर को बुलवाया। मैनेजर ने बंधन मुक्त वाले कागज पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। तहसीलदार ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कई लोग संदेह के घेरे में हैं।
तहसीलदार धर्मेंद्र पांडे ने बताया गांव दुर्गापुरवा निवासी डीराम की दुबहा गांव में जमीन है। यह जमीन खतौनी में दो खातों पर दर्ज है। जमीन बंधक रखकर कस्बे की इलाहाबाद बैंक से ढाई लाख रुपये कर्ज लिया गया था। इसमें से एक खाते की कुछ जमीन उसने दुर्गापुरवा गांव की किरन को कई महीने पहले बेची थी। गांव दुबहा के पास की भूमि निघासन के दामोदर वर्मा और उनकी पत्नी रीता वर्मा ने भी 2018 में खरीदी थी। भूूमि बंधक होने के कारण खरीदी गई भूमि का दाखिल खारिज नहीं हो सका। कुछ दलालों ने दाखिल खारिज कराने के लिए बैंक के पैड पर फर्जी बंधकमुक्त होने का प्रमाणपत्र बनाकर खतौनी पर दर्ज करा दिया। जिसके चलते किरन ने अपनी भूूमि का दाखिल खारिज करा लिया। दामोदर भी भूमि का दाखिल खारिज कराने के लिए तहसील पहुंचे। दामोदर वर्मा ने जब इस बाबत तहसीलकर्मियों से जानकारी की तो संबंधित तहसीलकर्मियों को बैंक के नो ड्यूज पर शंका हुई। तहसीलदार के बुलाने पर इलाहाबाद बैंक मैनेजर मनोज कुमार ने तहसील जाकर बैंक से जारी कई नोड्यूज देखे तो इन पर अपने दस्तखत आदि फर्जी बने पाए।
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--मैंने किसी भी नोड्यूज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। नोड्यूज पर बैंक की मोहर लगी होने के कारण बैंक कर्मचारी भी इस मामले में संलिप्त होने की शंका है। फिलहाल मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला है। उनके आदेशानुसार रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
- मनोज कुमार, प्रबंधक इलाहाबाद बैंक निघासन
-बैंक मैनेजर को बुलाकर कागजों की जांच कराई, जिसमें फर्जीवाडा पाया गया है। मैनेजर ने संबंधित जमीन बैंक में बंधक होना बताया है। इसकी जांच करके इनको पेश करने वाले जमीन खरीदकर दाखिल-खारिज कराने वाले दोषी व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. धर्मेद्र कुमार पांडे, तहसीलदार निघासन