लखीमपुर खीरी। जिले में एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाईटिस सिंड्रोम ) का प्रकोप नहीं थम रहा है। रोजाना प्रभावित बच्चे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। शुक्रवार को एक आठ माह के बच्चे में एईएस की संभावना लगने पर उसे चिल्ड्रन वार्ड से आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि आईसीयू वार्ड में कई दिनों से भर्ती दो वर्षीय बच्चे की सेहत में सुधार न होने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया।
बिजुआ ब्लॉक के कस्बा भीरा निवासी रमेश कुमार बुखार पीड़ित आठ माह के बच्चे को जिला अस्पताल लेकर आए थे, जिसकी हालत गंभीर होने पर उसे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। इलाज के दौरान बच्चे में एईएस की संभावना लगने पर उसे आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि आईसीयू वार्ड में 19 अप्रैल से भर्ती दो वर्षीय आदेश पुत्र नागेश्वर निवासी लोनियनपुरवा ब्लॉक निघासन की हालत में सुधार न आने पर उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया।
एईएस के लक्षण
बुखार, सिरदर्द, उल्टी होना या फिर महसूस होना, उल्टी के साथ दस्त होना, मांसपेशियों में दर्द होना, उलझन, चिड़चिड़ापन, झटके आने के साथ बच्चे की ठोड़ी का सीने में न लगना।
एईएस से बचाव
एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार का कहना है कि एईएस का प्रमुख कारण पानी है। इसलिए पीने के लिए सदैव शुद्ध पेयजल का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए इंडिया मार्का नलों का पानी पीने के लिए प्रयोग करें। घरों में भी यदि नल लगवाएं तो उसकी बोरिंग काफी गहरी कराएं। इसी के साथ नल घर में लगा हो या फिर सरकारी, उसके आस पास पानी न जमा होने दें। घर के आसपास भी सफाई आदि का विशेष ध्यान रखें।