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Kushinagar News: ‘रईस’ बनने के चक्कर में युवाओं ने पकड़ी ‘पुष्पा’ की राह

Thu, 23 Jan 2025 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। सोशल मीडिया और फिल्मों का असर अब युवाओं के दिलो-दिमाग पर छाने लगा है। इससे प्रेरित होकर युवा अब फिल्मी फंडों को असल जिंदगी में अपनाने लगे हैं। पहले शाहरुख खान की ‘रईस’ और अब अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ ने भी युवाओं के सोचने के नजरिए को भी बदल दिया है। फिल्मों में दिखाए तस्करी के तरीकों को अपनाकर युवा पैसे कमाने में जुट गए हैं।
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शराब के धंधे से जुड़े कई ऐसे चेहरे हैं जो फर्श से अर्श पर पहुंच गए और अब इनकी गिनती बड़े चेहरों में की जाने लगी है। युवाओं की लालच और संलिप्तता बढ़ी तब तक पुलिस सक्रिय हो गई, लेकिन युवाओं ने दिमाग और तरकीब से शराब तस्करी के गति को कम नहीं होने दी।
2016 के पहले बिहार से यूपी के कुशीनगर और आसपास के जिले खास कर पूर्वांचल में शराब की तस्करी होती आई है। तब बिहार में सस्ती शराब के कारण आसानी से यहां के लोगों को सस्ते दाम पर शराब मिल जाया करती थी। बिहार में शराब बंदी होने के बाद शराब बेचने से लेकर पीने वाले तक ने तरीका बदल लिया। शराब की सप्लाई के लिए हरियाणा, पंजाब, कुरुक्षेत्र आदि बड़े शहरों से शराब की खेप कुशीनगर के रास्ते पहुंचने बिहार के जिलों में लगी।
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तस्करी के इस धंधे में युवाओं की तादाद काफी ज्यादा है। यह जोखिम लेने से भी नहीं कतरा रहे हैं। इन दिनों जिले के अलावा गोपालगंज और पश्चिम चंपारण की सीमा से तस्कर दबोचे जा रहे हैं। शराब तस्करी में दबोचे जाने वाले शातिरों में अधिकांश युवा शामिल हैं। इनको सफेदपोश और जिले के बड़े चेहरों की मदद मिल रही है। जानकारों के अनुसार युवाओं का शराब तस्करी से जुड़ना कम दिनों से आर्थिक मजबूती, शौक पूरा करना के अलावा कहीं न कहीं लालच और बेरोजगारी भी है।
बिहार की शराबबंदी से शराबी तो कम नहीं हुई, लेकिन जिले के कई ऐसे चेहरे हैं, जिनकी माली हालत तो बदली ही, उन्होंने खुद को बचाने के लिए राजनीति की चादर भी ओढ़ ली। साल 2016 से पहले बिहार में शराब सस्ती थी और इसलिए बिहार से बड़े पैमाने पर शराब कुशीनगर जिले के बाॅर्डर वाले थाना क्षेत्रों में आती थी। बिहार में शराब की बिक्री पर पाबंदी लगने के बाद यूपी के रास्ते बिहार में शराब तस्करी होने लगी। इस बीच हरियाणा, पंजाब आदि शहरों से शराब को बिहार तक पहुंचाने के लिए लोग शामिल होते चले गए। बड़े धंधेबाज बिहार में बैठे ही इन युवाओं को डिलीवरी का ऑर्डर देते हैं और तय स्थान पर युवक पुलिस की नजरों से छिपाकर शराब की खेप पहुंचा देते हैं। पिछले कुछ महीनों में गिरफ्तार युवा और किशोर और तस्करी के तरकीब से जुड़े आंकड़े इस बात की गवाही दे रही है। एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए तमकुहीराज सीओ अमित सक्सेना के नेतृत्व में पुलिस काम कर रही है। इस धंधे में शामिल युवाओं की सूची बनाने के साथ-साथ इनका नेटवर्क खंगाला जा रहा है।
आसपास के जिलों में शराब की सप्लाई : आबकारी विभाग समय-समय पर शराब पर लगाम लगाने के लिए भले ही अभियान चला ले। मगर, अपना टारगेट पूरा करने के लिए यह भी कई बार आंखें मूंद लेते हैं। सूत्रों के मुताबिक जो बात निकल सामने आ रही है वो हैरान करने वाली है। दरअसल, आबकारी विभाग पर टारगेट पूरा करने का दबाव रहता है। कई साफ शराबियों की आमद से आबकारी विभाग खपत कर रिपोर्ट लगा देता है, लेकिन नाकामी छिपाने और राजस्व में वृद्धि कर अग्रणी रहने के लिए कई दफा शराब आसपास के बिहार के जिलों में सरकारी दुकानों से भेज दी जाती है।
तस्करों की दिख रही सांठगांठ : जिले के सीमावर्ती तरयासुजान, बहादुरपुर, तमकुही राज आदि क्षेत्र के तस्कर अक्सर ही बिहार के गोपालगंज, मुजफ्फरपुर व अन्य दूसरे जिलों के तस्करों के साथ पकड़े जाते हैं। इनमें तस्कर सीमावर्ती इलाकों से शराब को पार कराने के लिए भी इनका सहारा लेते हैं। स्थानीय होने के नाते इन्हें सहज ही पूरे रास्तों का अंदाजा होता है और यह अपनी भूमिका में सफल हो जाते हैं।
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