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आयुष्मान को चूना : बिहार में अल्ट्रासाउंड की फर्जी रिपोर्ट... पडरौना में होता है ऑपरेशन

Thu, 23 Jan 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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- पडरौना से लेकर बिहार तक दलालों का रैकेट सक्रिय, आयुष्मान योजना में चयनित है पडरौना का अस्पताल
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- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ ने शुरू कराई जांच

पडरौना। अल्ट्रासाउंड की फर्जी जांच रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन करके आयुष्मान योजना में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के एक निजी अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीएमओ ने जांच के लिए टीम गठित कर दी है। बुधवार को दोपहर में टीम अस्पताल पर पहुंची और आयुष्मान योजना के तहत बीते तीन माह में इलाज कराने वाले मरीजों की सूची ली। अब सूची की जांच कराई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जटहा रोड के नवजीवन ज्योति अस्पताल के डॉक्टर का नेटवर्क बिहार तक फैला हुआ है। दलालों के माध्यम से बिहार के अल्ट्रसाउंड सेंटरों से बीमारियों की फर्जी रिपोर्ट तैयार कराकर आयुष्मान योजना के तहत ऑपरेशन किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अस्पताल के डॉ. राजेश यादव कहते नजर आ रहे हैं कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में यूरेटर में पथरी दिखवा दिया जाता है और मरीज का ऑपरेशन कर दिया जाता है। इस सिस्टम में जुड़े लोगों को तय रकम देनी पड़ती है। वीडियो में डॉक्टर गर्भाशय तक निकालने की बात वीडियो में कह रहे हैं।
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बताया जा रहा है कि 100 से अधिक मरीज रोजाना बिहार से इस अस्पताल में पहुंच रहे हैं। आयुष्मान योजना में भ्रष्टाचार का खेल बिहार से कुशीनगर तक जारी है। दलाल बसों और चार पहिया वाहनों से बिहार के मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत ऑपरेशन कराने के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। दलालों के नेटवर्क में फंसे मरीजों से रुपये ऐंठने के लालच में डॉक्टर ऑपरेशन कर रहा है।
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कोट
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन माह के अंदर ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की सूची अस्पताल संचालक से ली है। बिहार में कहां फर्जी तरीके से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार की जाती है और मरीज कौन हैं इसके बारे में जांच चल रही है। आयुष्मान योजना के नाम ऐसे फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट में शामिल सभी लोगों को ट्रेस कराया जा रहा है।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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पहले भी निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर हो चुका है फर्जीवाड़ा
- स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार नहीं कस पा रहे शिकंजा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जटहा रोड स्थित निजी अस्पताल में मरीजों के इलाज और आयुष्मान के नाम फर्जीवाड़े के मामले पहले भी आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़ रोक नहीं पा रहे हैं। कुछ माह पूर्व जांच में नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के कोटवा बाजार में संचालित खुशी हॉस्पिटल पांच महीने से बिना पंजीकरण संचालित पाया गया था।
नेबुआ नौरंगिया सीएचसी के अधीक्षक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव की टीम की जांच के दौरान लेटर पैड पर नौ डॉक्टरों के नाम दर्ज थे लेकिन संचालक बिना किसी डिग्री और प्रशिक्षण के खुद ही मरीजों का इलाज और ऑपरेशन करता पाया गया था। भर्ती मरीजों की बीएसटी पर न तो एनेस्थिसिया के डॉक्टर के हस्ताक्षर मिले और न ही किसी सर्जन के। जांच में इस बात की पुष्टि होने के बाद संचालक राजू श्रीवास्तव के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था।
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आयुष्मान योजना के सीईओ से शिकायत पर हुई थी जांच
क्षेत्र के एक व्यक्ति ने आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर खुशी हॉस्पिटल की जांच की मांग की थी। शिकायत में बताया था कि आयुष्मान योजना में भी यह हॉस्पिटल सूचीबद्ध है। डॉक्टरों के फर्जी पंजीकरण, आयुष्मान लाभार्थियों की फर्जी रिपोर्ट तैयार करने व गलत तरीके से उपचार का भी आरोप लगाया था। आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में जेल में बंद डीपीसी डॉ. दीपक कुशवाहा व आईएसएडीसी अखिलेश विश्वकर्मा की भी संलिप्तता का संदेह जताया था।
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नौ चिकित्सकों का नाम दिखाकर करता था भ्रमित
जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि हॉस्पिटल के लेटर पैड पर नौ चिकित्सकों के नाम दिखा कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। चिकित्सक के नाम के स्थान पर डॉ. खुशी हास्पिटल लिख रखा था। जांच में पता चला कि गुड्डी देवी पत्नी जितेन्द्र यादव निवासी ग्राम सिंगहा का बच्चेदानी का ऑपरेशन व सुनीता देवी पत्नी अर्जुन चौरसिया निवासी बलकुड़िया बाजार का बच्चेदानी व पित्त की थैली का ऑपरेशन एक साथ किया गया। बीएचटी में एनेस्थिसिया नोट्स में मरीज के पति के हस्ताक्षर मिले थे।

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फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का भी सामने आ चुका है मामला
- गोरखपुर के हॉस्पिटल से लौटा दिया गया था कैंसर पीड़ित
पडरौना। आयुष्मान योजना जिले में दलालों की भेंट चढ़ गई है। एक महीना पहले ही आयुष्मान योजना में हुई गड़बड़ी के मामले में डीपीसी समेत चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद भ्रष्टाचार का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दिनों सीएससी संचालक ने कैंसर पीड़ित से 6500 रुपये लेकर आयुष्मान कार्ड बना दिया, लेकिन जब पीड़ित गोरखपुर स्थित अस्पताल में पहुंचा तो आयुष्मान कार्ड शुरुआती जांच में ही फर्जी पाया गया।
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शहर का एक व्यक्ति करीब दो माह पहले सुभाष चौक स्थित जनसेवा केंद्र पर आयुष्मान कार्ड बनवाने पहुंचा। सीएससी संचालक ने पहले तो उसे अपात्र बताया और फिर बाद में कार्ड बनाने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की। उस व्यक्ति ने 65 सौ रुपये संचालक को दिए। कुछ घंटे बाद ही उसके नंबर पर फोन कर संचालक ने अपनी दुकान पर बुलाया और कार्ड बनाकर दे दिया। कुछ दिन बाद वह व्यक्ति कैंसर से पीड़ित हो गया और कार्ड के जरिए इलाज कराने गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में पहुंचा। जब अस्पताल कर्मियों ने जांच की तो कार्ड फर्जी मिला। एक ही नाम के दूसरे व्यक्ति का पता बदलकर कार्ड जारी किया गया था।
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