डिजिटल युग में मैनुअल मशीन से मरीजों का हो रहा एक्स-रे
अस्पताल में एक्स-रे मशीन को लगे 15 साल गुजर चुका है
- सिर्फ चार से पांच मरीजों का मुश्किल से हो पाता है एक्स-रे
- बिजली की किल्लत भी मशीन चलाने में है बाधा
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। तकनीक और डिजिटल युग में आज भी कसया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (प्रथम रेफरल यूनिट) में 15 से अधिक पुरानी मैनुअल एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस मशीन की गुणवत्ता इतनी खराब है कि हड्डी में हल्की दरारें समझ में नहीं आतीं हैं। यहां महज हाथ, पैर सीने व कंधे का किसी तरह से एक्स-रे हो पा रहा है। ऐसे में मरीजों को स्पष्ट और बेहतर एक्स-रे के लिए नगर के निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
350-400 मरीजों की प्रतिदिन है ओपीडी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने वाले मरीजों की तादाद और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बीच बड़ा अंतर है। यह अस्पताल प्रथम रेफरल यूनिट है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार यहां प्रतिदिन ओपीडी में 350-400 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिसमें विभिन्न तरह के मरीज होते हैं। उनमें से कुछ को एक्स-रे की जरूरत होती है, लेकिन मैनुअल मशीन से एक एक्स-रे करने के लिए कम से कम आधे घंटे तक तैयारी करनी पड़ती है। एक्स-रे टेक्निशियन राम विलास सिंह ने बताया कि एक्स-रे मशीन के संचालन में सबसे बड़ी बाधा बिजली की आपूर्ति है। इसके के लिए कोई प्रबंध नहीं है।
मशीन चलाने में अधिक बिजली की होती है जरूरत
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मैनुअल एक्स-रे मशीन चलाने के लिए अधिक वोल्टेज की जरूरत पड़ती है। अगर वोल्टेज की समस्या आई तो पूरी फिल्म सफेद हो जाती है। अस्पताल में प्रतिदिन चार से पांच मरीजों का एक्स-रे होता है, लेकिन मशीन पुरानी होने के कारण इतनी कम संख्या में भी दिक्कतें होती है।
अलग-अलग साइज के एक्स-रे प्लेट उपलब्ध
एक्स-रे टेक्निशियन राम विलास सिंह ने बताया कि मरीजों के एक्स-रे करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाली फिल्म की प्लेट उपलब्ध हैं। इसकी कोई कमी नहीं है, लेकिन मशीन मैनुअल नहीं डिजिटल होनी चाहिए। बताया कि अस्पताल में वर्तमान में 12 गुणे 15, 10 गुणे 12, 12 गुणे 12 और 8 गुणे 10 साइज की एक्स-रे करने के लिए फिल्म व प्लेट उपलब्ध है।
रेडियोलॉजिस्ट की भी है जरूरत
अस्पताल में तैनात एक्स-रे टेक्नीशियन के अनुसार मरीजों का सही और स्पष्ट एक्स-रे हो, इसके लिए बगैर डिजिटल मशीन के करना संभव नहीं है। बताया कि सिर्फ एक्स-रे टेक्नीशियन ही नहीं अस्पताल को एक रेडियोलॉजिस्ट की भी जरूरत है। जो एक्स-रे फिल्म देखकर मरीज को सही-सही रिपोर्ट तैयार कर दे सके, जिसका मरीज संबंधी बीमारी में उपयोग किया जा सके।
वर्जन-
डिजिटल एक्स-रे मशीन, एक आर्थोपेडिक चिकित्सक, अल्ट्रासाउंड मशीन और जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण कर नए भवन बनाने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया है। उम्मीद है कि जांच की मशीनें मिल जाएं, जिससे मरीजों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़े।
डॉ. नीलकमल, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कसया