सुकरौली। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गुड़, गुलाल और अगरबत्ती बनाकर पहचान बनाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बीमा सखी बनकर गांव-गांव जाकर जीवन बीमा करेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एनआरएलएम और एलआईसी के संयुक्त प्रयास से सुकरौली ब्लॉक में इसकी शुरुआत हो गई है।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एनआरएलएम और एलआईसी ने बड़ा कदम उठाया है। योजना के तहत समूहों की चयनित महिलाओं को एलआईसी का अधिकृत बीमा सलाहकार बनाया जाएगा। फिलहाल सेंदुआर, महुअवा, रामपुर सोहरौना सहित सुकरौली ब्लॉक के चार गांवों के समूह की सदस्याें का चयन बीमा सखी के रूप में किया गया है। चयनित महिलाओं को विभाग की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद एलआईसी की परीक्षा होगी।
परीक्षा पास करने पर महिलाओं को एलआईसी का अधिकृत कोड जारी होगा। इसके लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल और आयु 18 से 60 वर्ष निर्धारित है। चयनित महिलाओं का स्वयं का भी निशुल्क बीमा कराया जाएगा। प्रत्येक बीमा सखी को एक वर्ष में न्यूनतम एक लाख रुपये के बीमा व्यवसाय का लक्ष्य दिया जाएगा। एनआरएलएम के प्रबंधक पंकज कुमार ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक में चरणबद्ध तरीके से 10 बीमा सखियों का चयन किया जाएगा।
भविष्य में एनआरएलएम का लक्ष्य है कि प्रत्येक ग्राम सभा में कम से कम एक बीमा सखी हो, ताकि ग्रामीणों को बीमा सुविधा गांव में ही मिल सके। एनआरएलएम डीसी फैजल आलम ने बताया कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। महिलाएं गांव की जरूरतों को बेहतर समझती हैं, इसलिए वे लोगों को बीमा के लिए प्रेरित कर सकेंगी।