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Kushinagar News: राजस्वकर्मियों का साथ, सफेदपोशों का मिला संरक्षण, बिकती गई जमीनें

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पडरौना। राजघराने से जुड़ी जमीन का मामला भले ही हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन राजस्व कर्मियों का साथ और सफेदपोशों का संरक्षण मिलता गया और भू माफिया बेशकीमती जमीनों को प्लाटिंग कर बेच दिया। इतना ही नहीं राजघराने की अधिकांश जमीनों का रिसीवर डीएम को नियुक्त किया है। सिलिंग में निकली जमीनों का अभी चकबंदी होना भी बाकी है, इसी बीच जमीनों को बेच दिया गया है। सुरेंद्र यादव और शदर कुमारी के बीच विवाद गहराया तो कई सफेदपोशों का चेहरे बेनकाब हुए और पुलिस की ओर से कार्रवाई भी की गई। इस मामले में हाईप्रोफाइल लोगों का नाम शामिल होने के कारण पुलिस कुछ बोलने से परहेज तो कर ही रही है, डीएम की ओर से कराई गई जांच भी ठंडे बस्ते में है। कोर्ट की ओर से दर्ज प्राथमिकी में शामिल आरोपी एफआर लगाने के लिए एड़ी चोटी लगा दिए हैं।
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शहर में राजघराने से जुड़ी सैकड़ों एकड़ जमीन है। इस जमीन के अधिकांश नंबरों पर खरीद बिक्री पर रोक भी है और रिसीवर डीएम को नियुक्त किया गया है। बावजूद इसके भू माफियाओं ने प्लाटिंग कर जमीन को धड़ल्ले से बेच रहे हैं। इसमें सत्ता पक्ष से जुड़े अधिकांश प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इसके चलते नियम कानून भी इनके सामने कमजोर पड़ जा रहे हैं। बेलवा टोला चौरिया निवासी सुरेंद्र यादव समेत नौ आरोपियों ने जिस जमीन को बेचा है और उस पर कालोनी बन गई है, उस जमीन पर शरद कुमारी अपना दावा करते हुए सुरेंद्र यादव समेत नौ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज जनवरी में कराई। यह कार्रवाई डीएम की ओर से कराई गई जांच के बाद से हुई, वहीं शरद कुमारी से जिला पंचायत अध्यक्ष के दो बेटे समेत 15 लोग बैनामा लिए हैं और प्लाटिंग कर जमीन को बेच रहे हैं, सुरेंद्र यादव ने खुद की जमीन बताते हुए कोर्ट के आदेश पर जिला पंचायत अध्यक्ष के दो बेटे समेत 15 लोगों पर दो दिन पूर्व प्राथमिकी दर्ज कराया। इसमें कई चर्चित और प्रभावशाली लोगों का नाम शामिल है, इसके चलते कोतवाली पुलिस भी कार्रवाई के बाद से ही कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए प्राथमिकी को गलत बताते हुए एफआर लगाने की राग अलापने लगी। शरद कुमारी काफी बुजुर्ग हो गई हैं और आने की स्थिति में नहीं हैं। इनसे जमीन का बैनामा कराने वाले ही इनके जमीन से जुड़ी लड़ाई को लड़ रहे हैं। सूत्रों की माने तो राजघराने से जुड़े जमीन जो सिलिंग में निकली है, उसकी चकबंदी की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। आपसी बटवारा भी नहीं हुआ है, लेकिन कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से शहर और इसके आस-पास की जमीनों को प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है। हालांकि डीएम की ओर से इसकी जांच भी कराई जा रही है।
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