तमकुहीरोड। वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में छोड़े गए पानी का डिस्चार्ज बृहस्पतिवार को सुबह दस बजे 92 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। इससे फिर एपी और नरवाजोत बांध पर खतरा बढ़ गया है। विभाग के अभियंता बचाव कार्य पूरा करने में जुटे हैं। लोगों का कहना है कि अभी क्षेत्र में मानसून पूरी तरह सक्रिय नही है। जैसे ही मानसून सक्रिय होगा, नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगेगा। इससे बचाव कार्य प्रभावित होने के साथ ही बांध और बांध के किनारे बसी लगभग बीस हजार से अधिक की आबादी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
सेवरही मे नरवाजोत एक्सटेंशन से लेकर अहिरौलीदान तक करीब साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। जुलाई व अगस्त बांध की सुरक्षा के लिए काफी संवेदनशील माना जाता है। इस महीने में वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में डिस्चार्ज अधिक हो जाने पर तटबंधों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। पिछले साल नरवाजोत, जवही दयाल और विरवट कोन्हवलिया में बाढ़ व कटान का खतरा उत्पन्न हो गया था और कई जगह अफरा-तफरी मच गई थी।