पडरौना। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। रविवार को खरना होगा। सोमवार से निर्जला व्रत शुरू होगा। नदी, पोखरे व तालाब के किनारे बनी छठ वेदियों के समक्ष पूजन के साथ 27 अक्तूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण होगा। 28 को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय इस पर्व का समापन होगा।
छठ पूजा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। शहर से लेकर गांवों तक घाटों व पोखरों की साफ-सफाई का काम अंतिम चरण में है। दउरी बनाने वाले काम में युद्ध स्तर पर जुटे हैं। व्यापारी विभिन्न प्रकार के फलों को मंगा रहे हैं। लोग पूजा के लिए छोटी से छोटी सामग्री जुटाने लगे हैं। छठ पूजा के लिए कोसी, पीतल या बांस का सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, फल आदि की जरूरत होती है। 26 को खरना है। यह सूर्य षष्ठी व्रत का द्वितीय दिवस रहेगा। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास करती हैं। इसके बाद व्रत खोलने में नैवेद्य अर्थात प्रसाद का उपयोग होता है। इस दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। सोमवार को सायंकालीन अर्घ्य दिया जाएगा।
पंडित मदन मोहन मिश्रा ने बताया कि इस पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता, भक्ति एवं अध्यात्म है। इसकी उपासना पद्धति एकदम सरल है, जिसमें किसी आचार्य की आवश्यकता नहीं है। यह लौकिक रीति-रिवाजों एवं सरल ग्रामीण जीवन पर आधारित है। वर्तमान में इसकी सादगी में परिवर्तन आ रहा है। अब बड़े-बड़े पंडाल लगाए जा रहे हैं, जिसमें सूर्यदेव की मूर्ति स्थापित की जा रही है। पटाखे छोड़े जा रहे हैं।