पडरौना। रबी फसलों की बुवाई से पहले खाद की किल्लत न हो, इसके लिए जिला प्रशासन अलर्ट है। पिछले साल डीएपी-यूरिया के लिए किसानों को लंबी लाइनें और परेशानी झेलनी पड़ी थी। इस बार समय रहते खपत के अनुसार उर्वरक की डिमांड भेजी गई है। कृषि विभाग ने सभी समितियों पर स्टॉक की निगरानी बढ़ा दी है।
रबी सीजन 2025-26 के लिए जिले में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्रशासन ने कमर कस ली है। डीएम के निर्देश पर कृषि विभाग ने जिले के किसानों की जरूरत के हिसाब से डीएपी, यूरिया और एनपीके का एडवांस डिमांड शासन को भेज दिया है। पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में गेहूं बुवाई के समय डीएपी-यूरिया की भारी किल्लत हुई थी। समितियों पर सुबह से लाइन लगती थी और कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा था। कालाबाजारी की शिकायतें भी आई थीं। किसानों की शिकायत रबी के सीजन में न हो, इसके लिए कृषि विभाग की टीम गांव-गांव जाकर किसान गोष्ठी कर रही है। बुवाई के रकबे के अनुसार उर्वरक की जरूरत का आकलन किया जा रहा है।
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पिछले सीजन में उर्वरक की हुई किल्लत को देखते हुए विभाग की तरफ से इस बार व्यापक तैयारी की गई है। अभी से बफर स्टॉक बनाया जा रहा है, ताकि बुवाई के समय मारामारी न हो। इसके अलावा अब तक जिले में उपलब्ध उर्वरक को जरूरत के अनुसार समितियों में भेजा जा रहा है। -डॉ. मेनका, जिला कृषि अधिकारी, कुशीनगर।
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पिछली बार दो-दो दिन लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिली थी। इस बार प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा है, यह अच्छी बात है। अगर समय पर खाद मिल गई तो बुवाई समय से हो जाएगी। - सीपीएन सिंह, किसान।
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निर्धारित मानक के अनुसार खाद का उपयोग करने पर किसी प्रकार की किल्लत नहीं होगी। आवश्यकता से अधिक यूरिया खेतों में डालने की प्रवृत्ति के कारण मांग बढ़ जाती है, जिससे वितरण व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। किसानों को भी अपनी जरूरत के अनुसार ही उर्वरक खरीदना चाहिए। -राकेश मोहन, किसान।