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Kushinagar News: पाकिस्तान से भिड़ने को तैयार हैं फाजिलनगर के तीन जवान

Sun, 11 May 2025 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। फाजिलनगर क्षेत्र के लवकुश गांव के तीन भाई सीमा पर तैनात हैं। वर्तमान में तीन भाइयों के एक सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत होकर पंजाब में राजस्व निरीक्षक हैं, जिन्हें वहां के प्रशासन ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहने को कहा है। एक भाई राजस्थान के श्रीगंगानगर में तैनात हैं। तीसरे भाई को रिकॉल ड्यूटी में अरुणाचल प्रदेश बुलाया गया है। भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक तरफ इनके पिता को मां भारती के इन सच्चे सपूतों को लेकर डर है तो उन्हें इस बात का गर्व भी हो रहा है कि उनके बेटे देश की रक्षा में काम आ रहे हैं।
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फाजिलनगर क्षेत्र के लवकुश पश्चिम पट्टी गांव के इंद्रजीत मिश्र के चार लड़कों में तीन सेना के थल और सशस्त्र बलों में अलग-अलग जगहों पर तैनात हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर में इंद्रजीत मिश्र का छोटा बेटा दिनकर मिश्र तैनात हैं। इस समय यहां सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दिनकर सेना में 2015 में भर्ती हुए। वह टैंक गनर हैं। वह इस समय संघर्ष के पड़ाव पर जमे हुए हैं। दिनकर ने मां भारती की सेवा का रास्ता चुना और शुक्रवार को अपने परिजनों को घर भेज दिया। इसके अलावा रत्नाकर मिश्र भी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में 2012 से हैं। दो दिन पूर्व विभाग से छुट्टी का आदेश निरस्त होने के बाद वह अपने परिवार को गोरखपुर छोड़ अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती इलाके में रवाना हो गए और वहां मोर्चा संभाले हैं। वहीं दिवाकर मिश्र भाइयों में सबसे बड़े हैं तीन वर्ष पूर्व सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत होकर बतौर राजस्व निरीक्षक लुधियाना के सीमांत इलाके में ही सेवा दे रहे हैं। 2002 से 2021 तक की अपनी सेवा में दिवाकर ने जम्मू के सबसे संवेदनशील अखनूर सेक्टर में भूमिका निभाई। दिवाकर ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने बढ़ते तनाव के बीच उनकी भी ड्यूटी लगाई हैं। वह देश सेवा के लिए तैयार हैं।

पिता ने कहा- बेटों की हिम्मत पर नाज



लवकुश पश्चिम पट्टी गांव के इंद्रजीत मिश्र के चार बेटों में तीन देश की रक्षा में अपना योगदान लंबे समय से दे रहे हैं।बेटों के ऊपर से मां का हाथ 2005 में ही उठ जाने के वावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और देश रक्षा के लिए हर स्तर का संघर्ष किया। बड़े भाई 2002 में सेना में बतौर सूबेदार धर्मगुरु भर्ती हुए तो पिता ने अन्य बेटों को सीख लेने की प्रेरणा दी और 2012 और 2015 में दो और भाई मां भारती की सेवा के लिए जुड़ गए। इन दिनों भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा है तो इंद्रजीत मिश्र की बेटों से अधिक बात नहीं हो पा रही है, लेकिन वह आश्वस्त हैं कि उनका खून देश के लिए काम आ रहा है। बताया कि बच्चों की फिक्र जरूर रहती है लेकिन गौरवान्वित हूं। वहीं इनके बेटे और पत्नियां भी चिंतित होने के साथ पति के इस अभियान में साथ हैं। खतरे के कारण इन्होंने अपने परिवार को खुद से अलग करते हुए पारिवारिक मोह का त्याग करते हुए देश रक्षा की राह चुनी है।
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