पडरौना में खोआ बनाता दुकानदार। संवाद
पडरौना। सहालग शुरू होते ही बाजार में दूध, पनीर और खोआ की मांग बढ़ गई है। इसका फायदा उठाने के लिए मिलावट करने वाले धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। पाउडर और पैकेट के दूध में आरारोट मिलाकर बने पनीर सस्ते दर पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो गया है। इसकी पुष्टि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एकत्र पनीर और खोआ की जांच रिपोर्ट भी कर रही है।
अनुमान के मुताबिक शहर में दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत प्रत्येक दिन होती है। हालांकि लोगों की मांग के हिसाब से यह घटती-बढ़ती है। सहालग, त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर इसकी खपत करीब चार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। जबकि, पशुपालक करीब एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं पैकेट दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है।
उत्पादन कम और खपत अधिक होने का ही लाभ धंधेबाज उठाते हैं। वे गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से बीते अप्रैल तक पनीर के 25 और खोवा के 11 नमूने एकत्र किए गए। इसमें से पनीर के पांच और खोआ के दो नमूनों की जांच रिपोर्ट मिली है। प्रयोगशाला से मिले पनीर के पांच जांच रिपोर्ट में से तीन नमूने फेल मिले हैं। इसी तरह खोआ के मिले दो जांच रिपोर्ट में से एक नमूने की रिपोर्ट अधोमानक मिली है।
इस जांच रिपोर्ट में फैट कम होने की पुष्टि हुई है। प्रयोगशाला से मिली रिपोर्ट के अनुसार पनीर में फैट 50 प्रतिशत से भी कम मिला है, जो अधोमानक की श्रेणी में आता है। जानकारों के अनुसार मिलावटखोर दूध से मलाई (घी) निकाल लेते हैं। कई मिलावटखोर पाउडर के दूध से पनीर तैयार करते हैं। पनीर और खोआ में चिकनाहट रहे इसके लिए उसमें रिफाइन या पाॅप आयल मिलाकर तैयार कर देते हैं। मांग बढ़ने पर धंधेबाज पानी तो मिलाते ही हैं अब पाउडर से बना दूध भी बाजार में बेच दे रहे हैं। पशुपालन विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों का भी है।