पडरौना। परिवहन निगम ने जिन प्राइवेट बसों को अनुबंध किया, उनमें से कई बसें ऐसी हैं, जिन पर न तो अनुबंधित लिखा हुआ है और न ही वैधता तिथि लिखी हुई।
इसके बाद भी यह सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। रोडवेज से मिलती-जुलती कोई बस न चलाई जा सके, अनुबंधित और वैधता तिथि लिखनी जरूरी है। मगर इसके बाद भी यह स्थिति तब है कि जब कई अन्य जिलों में इस तरह रोडवेज के नाम पर निजी बसों का संचालन किया जा रहा है और विभाग की कार्रवाई में यह पकड़ी गईं हैं।
पडरौना डीपाे की तरफ से 24 अनुबंधित बसों का बेड़ा है। इसमें से अधिकांश बसें पडरौना और गोरखपुर के लिए संचालित होती हैं। कुछ बसें पडरौना-देवरिया मार्ग पर भी चलाई जाती हैं। परिवहन निगम टेंडर निकालकर प्राइवेट बसों को अनुबंध करता है।
सभी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। उसके बाद ही निगम प्राइवेट बसों को अनुबंध पर रखता है, लेकिन डिपो में कई अनुबंधित बसें ऐसी चल रही हैं, जिन पर वैधता की तिथि नहीं लिखी गई है। कई बसें ऐसी भी हैं, जिनपर अनुबंध के समय लिखी वैधता तिथि मिट गई है। इसका तभी पता चलता है कि जब इन पर अनुबंधित और उसकी वैधता की तिथि लिखी हो। एक ही रंग में अनुबंधित और प्राइवेट बसें होने के चलते यात्रियों को पता हीं नहीं चलता है कि जिस बस में वे बैठ रहे हैं, वे अनुबंधित हैं या प्राइवेट।
बस में जब वे टिकट लेते हैं तो उन्हें प्राइवेट बस की जानकारी होने पर खुद को ठगा महसूस करते हैं। इस संबंध में एआरएम सर्वजीत वर्मा ने बताया कि रोडवेज की अनुबंधित बसों पर वैधता की तिथि नहीं लिखे होने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो मामला गंभीर है। इसकी जांच कर तत्काल वैधता तिथि स्पष्ट अक्षरों में लिखवाई जाएगी।