मेडिकल काॅलेज में उमड़ी मरीजों की भीड़।
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभाग सिर्फ नाम का रह गया है। डॉक्टर नहीं होने के अभाव में हृदय रोगियों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है और गंभीर मरीजों को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है। एक साल में दो कार्डियोलॉजिस्ट ने ज्वाइन किया, लेकिन दोनों ही दो माह के अंदर अव्यवस्थाओं के कारण नौकरी छोड़कर चले गए। इससे मरीजों को सांसत झेलनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ईसीजी के अलावा हृदय रोगियों की जांच के लिए कोई आधुनिक मशीन उपलब्ध नहीं है। न तो इको, न टीएमटी और न ही अन्य आवश्यक जांच उपकरण। ऐसे में डॉक्टर चाहकर भी मरीजों का समुचित परीक्षण और इलाज नहीं कर पा रहे हैं। बीते तीन माह में कार्डियोलॉजी से जुड़े 212 मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में अधिकांश को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ समय और परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पीछे उद्देश्य जिले के मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना था, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के टिक न पाने और सुविधाओं के अभाव ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। हृदय रोग जैसे गंभीर मामलों में रेफर करना ही डॉक्टरों की मजबूरी बन गई है।
सीएमएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि कार्डियोलाजी के डॉक्टर बीच में आए थे, लेकिन छोड़कर चले गए। इसके लिए विज्ञापन निकाला गया है। कार्डियो के जो मरीज आते हैं, उनका इलाज फिजिशियन करते हैं, नहीं तो बीआरडी या एम्स रेफर कर दिया जाता है। उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।