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Kushinagar News: सरसों के तेल में भी खेल... हृदय रोग और कैंसर का खतरा

Sun, 15 Jun 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। मिलावटखोर सरसों के तेल में भी मिलावट करने लगे हैं। पैसे के लालच में सेहत के दुश्मन सरसों तेल के नाम पर सस्ता पाम ऑयल बेच रहे हैं। प्रतिबंधित सिंथेटिक कलर मिलाकर इसे सरसों तेल का रंग दिया जाता है।
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गंध के लिए एसेंस मिला देते हैं। इसकी पुष्टि खाद्य विभाग की तरफ से लिए गए 15 नमूनों से हुई। इनमें से एक नमूना प्रयोगशाला के मानक पर खरा नहीं उतारा। जांच में वह अधोमानक मिला था। जिले में सरसों उत्पादन का रकबा करीब 12 हजार हेक्टेयर है।
ऐसे में बाहर से तेल मंगाकर जरूरत की पूर्ति की जा रही है। बढ़ती मांग की वजह से मिलावट का खेल भी चल रहा है। शुद्ध सरसों के तेल के बारे में शहर में एक कारोबारी ने बताया कि स्वयं सरसों खरीदकर पेराई कराने के बाद तेल बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि हिसाब करने पर दो हजार रुपये का फायदा होता है। कारोबारी ने बताया कि सरसों आठ से 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिल जाता है। इसके रेट में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
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एक क्विंटल सरसों की पेराई कराने में 40 किलो यानी 44 लीटर शुद्ध तेल मिलता है। एक क्विंटल में करीब दो हजार रुपये की खली निकल जाती है। शुद्ध सरसों का तेल 180 रुपये लीटर और 200 रुपये किलो बिकता है। इस हिसाब से एक क्विंटल में आठ हजार रुपये का तेल मिलता है। इसके अलावा दो हजार रुपये की खली फायदे के रूप में मिल जाती है। हैरान करने वाली बात है कि इतनी मोटी पूंजी लगाकर भला कोई प्रति क्विंटल दो हजार का लाभ क्यों लेगा? पेराई कराने के बाद तेल बेचने पर बहुत कम फायदा होता दिख रहा है। यही वजह है की मिलावट का खेल शुरू होता है।
शुद्ध सरसों का तेल बताकर मिलावटी बेचकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कारोबारी के अनुसार, रोजाना 15 से 20 ट्रक सरसों का तेल बाहर से आता है। अस्पताल में पेट दर्द का इलाज कराने वाले लोगों को जांच के बाद डॉक्टर भोजन में प्रयोग तेल की गड़बडी की समस्या बताई।
सूत्रों की माने तो धंधेबाज पॉम ऑयल युक्त सरसों तेल अधिक मात्रा में पहुंचा रहे हैं। मिलावटी सरसों तेल की खपत होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर ज्यादा होती है। खुले बाजार में 140 से 150 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला सरसों तेल टिन के डिब्बे में 160-165 रुपये लीटर मिल रहा है। इसमें कारोबारियों की अच्छी बचत हो रही है।
अधिकतर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर ब्रांडेड सरसों तेल का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। खुले या टिन के डिब्बे में आने वाले तेल का ही उपयोग किया जा रहा है, जिसके सेवन से ग्राहकों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। लजीज व्यंजनों के नाम पर खराब सरसों तेल में पकाया हुआ खाद्य सामग्री लोग सेवन कर रहे हैं।
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