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भाजपा के आगे धराशायी हो गई दिग्गजों की रणनीति

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भाजपा के आगे धराशायी हो गई दिग्गजों की रणनीति
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दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने वाले स्टार प्रचारक स्वामी प्रसाद और लल्लू नहीं बचा पाए अपनी सीट
कुशीनगर। इस बार के विधानसभा चुनाव में बड़े नेताओं के दल बदलने से चुनाव का रुख बदल गया। लगातार तीन बार विधायक रह चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और लगातार दो बार से विधायक रहे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ को इस चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा। पूर्व राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह की रणनीति भी काम नहीं आई। उनके पुत्र को दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। जबकि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह अपने करीबी मनीष जायसवाल को जीत दिलाने में सफल रहे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की वजह से तमकुहीराज और फाजिलनगर विधानसभा सीट वीआईसी मानी जा रही थी। क्योंकि जनपद के विधानसभा चुनाव में इन्होंने जीत का जो सिलसिला शुरू किया था, वह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले तक कायम रहा। अजय कुमार लल्लू वर्ष 2012 से विधायक थे। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वह विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की तरफ से स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी रैलियों में भी शामिल हुए, लेकिन 2020 के चुनाव में अपने विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का भरोसा नहीं जीत सके।
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वर्ष 2009 से कुशीनगर जनपद की सियासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने सबसे पहले बसपा उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उस चुनाव में आरपीएन सिंह से हार का सामना करना पड़ा था, जिसकी भरपाई उन्होंने आरपीएन सिंह के सांसद चुने जाने के बाद रिक्त हुई सदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव जीतकर पूरी की थी। उसके बाद वर्ष 2012 में बसपा और 2017 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई थी। वह भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन इस बार नामांकन के पहले पद और पार्टी छोड़कर सपा से फाजिलनगर विधानसभा चुनाव में कूद पड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र कुशवाहा से हारना पड़ा।
अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने में सफल रहे आरपीएन
दशकों तक कांग्रेस में रहने के बाद भाजपा में आने पर पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के साथ मनीष जायसवाल भी सदर विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट लौटाकर भाजपा में आ गए। आरपीएन के प्रयास से उन्हें सदर विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट मिल गया। आरपीएन और पार्टी के सहयोग से मनीष को जीत मिल गई।
पुत्र को नहीं जीता पाए राधेश्याम सिंह
सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे राधेश्याम सिंह ने पुत्र रणविजय सिंह को इस चुनाव में हाटा से सपा उम्मीदवार बनवाया था। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाटा सहित पूरे जिले में पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में सभाएं और रोड शो किया था। इसकी देन रही कि उनके उम्मीदवार मुख्य मुकाबले में तो रहे, लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए।
किसे मिला, कितना मत
- सदर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार मनीष जायसवाल को 1,14,496 और सपा के विक्रमा यादव को 72,488 वोट मिले।
- फाजिलनगर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र कुशवाहा को 1,16,029 और सपा के स्वामी प्रसाद मौर्य को 71,015 वोट प्राप्त हुए।
- रामकोला (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार विनय प्रकाश गौड़ को 1,24,792 तथा
सुभासपा एवं सपा गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व विधायक पूर्णमासी देहाती को 52,249 वोट मिले।
- तमकुहीराज विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार डॉ. असीम कुमार को 1,15,123 और सपा के उदय नारायण गुप्ता को 48,651 और कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू को 33,496 वोट मिले।
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- हाटा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार मोहन वर्मा को 1,20,666 और सपा उम्मीदवार रणविजय सिंह को 61,301 वोट मिले।
- कुशीनगर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार पीएन पाठक को 1,15,268 एवं सपा उम्मीदवार राजेश प्रताप राव उर्फ बंटी को 80,478 वोट प्राप्त हुए।
- खड्डा विधानसभा सीट से निषाद पार्टी एवं भाजपा के उम्मीदवार विवेकानंद पांडेय को 88,291 और सपा से बगावत कर निर्दल चुनाव लड़ रहे विजय प्रताप कुशवाहा को 46,840 वोट मिले।
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