कसया नगर में पिकअप पर कोयला लोड करता मजदूर। संवाद
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कसया। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब जिले पर भी पड़ने लगा है। शहर से लेकर गांव तक रसोई गैस की किल्लत ने लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने पर विवश कर दिया है। खासकर शादी-विवाह के मौकों पर सिलिंडर की व्यवस्था करना चुनौती बन गई है। कैटरिंग वालों से लेकर होटल और मैरिज हॉल संचालक तक इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में कोयले और लकड़ी की खपत बढ़ गई है।
सहालग का सीजन अपने चरम पर है। सिलिंडर की सीमित आपूर्ति के कारण लोग अब मजबूरी में लकड़ी और कोयले के स्टॉक जुटाने में लगे हैं। लोग शादी के भोज के लिए सिलिंडर के भरोसे बैठने के बजाय पारंपरिक चूल्हों और भट्ठियों की ओर रुख कर रहे हैं। कोयले की मांग में तेजी से वृद्धि हुई है। कैटरर राजेंद्र मद्धेशिया ने बताया कि अब तक शादियों में सिलिंडर की कोई कमी नहीं रही है। इसके चलते अब कोयले की भट्ठियों का उपयोग करना मजबूरी हो गई है। उन्होंने बताया कि कोयले पर खाना बनाने में समय अधिक लग रहा है। धुएं और राख के कारण कामगारों को भी परेशानी हो रही है। कोयला व्यापारी नौशाद आलम का कहना है कि पहले की अपेक्षा ज्यादा कोयले की बिक्री बढ़ी है। अब यह बढ़कर दोगुनी हो गई है। लकड़ी व्यवसायी शकील अहमद ने बताया कि भी लकड़ी की मांग में वृद्धि हुई है।