कुशीनगर। पशु तस्करों को गिरफ्तार करने में लापरवाही और विवेचना में सुस्ती पर पुलिस प्रशासन सख्त हो गया है। एसपी ने विवेचकों की भूमिका की जांच कराने का फैसला किया है। इसे लेकर विवेचकों की बेचैनी बढ़ गई है। वहीं सख्ती बरतने के बाद अब तस्करों की गिरफ्तारी तेज हो गई है। 45 दिन में 34 पशु तस्करों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भिजवा चुकी है। इसमें 10 इनामी पशु तस्कर शामिल हैं। गिरफ्तार तस्करों में अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के रहने वाले हैं।
कुशीनगर के रास्ते पश्चिमी यूपी से बिहार तक पशु तस्करों का नेटवर्क
फैला है। गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी गांव में छात्र की पशु तस्करों ने हत्या कर उपद्रव मचाया था। सीएम ने भी इसका संज्ञान लिया था। शासन स्तर से कुशीनगर के दो इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा और सुशील शुक्ला समेत 25 पुलिसकर्मियों की मिलीभगत पर विभागीय कार्रवाई हुई थी। वहीं कुशीनगर के एसपी संतोष मिश्रा और देवरिया के एसपी विक्रांत वीर को भी कुर्सी गंवानी पड़ी।
इसके अलावा तीन साल से अधिक समय से एक ही थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी एसपी ने हटाया है। पूर्व में दर्ज मुकदमों के विवेचना में परत दर परत लापरवाही सामने आने पर एसपी ने सख्ती बरती और फरार चल रहे पशु तस्करों के सरगना को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। 45 दिन में 24 पशु तस्कर गिरफ्तार और 10 इनामी पशु तस्कर गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। इसमें अधिकतर गैर जनपद, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के रहने वाले हैं।
एसपी के मुताबिक फरार तस्करों की गिरफ्तारी नहीं होने से पशु तस्करी के खेल को रफ्तार मिलता रहेगा। सूत्रों की मानें तो अब तक मुकदमों में फरार चल रहे पशु तस्करों के सरगना की गिरफ्तारी नहीं होना विवेचकों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। पूर्व में जो भी पशु तस्करों को पुलिस जेल भेजती थी, उसमें अधिकतर कैरियर शामिल रहते थे। सरगना का नाम सामने आने के बाद भी पुलिस उन तक पहुंचने से परहेज करती रही।