पडरौना। नवसंवत्सर का शुभारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी बृहस्पतिवार से होगा। इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आएंगी और हाथी पर बैठकर प्रस्थान करेंगी।
पं. हरिओम मिश्र ने बताया कि पालकी में सवार होकर आने का संकेत यह है कि इस बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इसका असर पूरे विश्व पर पड़ेगा। देश-दुनिया महामारी और बीमारी की चपेट में आ सकती है। इसे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए भी शुभ नहीं माना गया है। पर्व के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि शुक्ल और ब्रह्म योग बन रहे हैं। मीन राशि में सूर्य, चंद्रमा, शनि और शुक्र का चतुर्ग्रही योग बन रहा है। साथ ही, मीन राशि में शुक्र के कारण मालव्य महापुरुष राजयोग भी बन रहा है।
इन योगों में माता की पूजा करने से शुभफल की प्राप्ति होगी। मान्यता है कि, इस दौरान माता रानी दुष्टों का नाश करती हैं और पाप कर्मों का दंड देती हैं। ऐसे में इस बार मां की स्तुति व भक्ति का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। नौ दिन व्रत रखने वाले 28 मार्च को व्रत का पारण करेंगे। उन्होंने बताया कि माता की वापसी गजराज पर होगी। दोनों वाहनों का उत्तम फल धर्मशास्त्र में बताया गया है। विजयपुर दक्षिण पट्टी के पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह 6:54 से 7:40 और 9:16 से 11:40 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा।