फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: उपेक्षित हैं महात्मा बुद्ध के गया से आने के मार्ग के धरोहर

विज्ञापन
विज्ञापन
- गया से कुशीनगर आते समय बकुलहर के घोड़धाप में रूक के महात्मा बुद्ध
विज्ञापन


जौरा बाजार। महात्मा बुद्ध गया से कुशीनगर तक के महापरिनिर्वाण यात्रा के दौरान जिन मार्गों से गुजरे थे। मार्ग के ज्यादातर ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर आज भी उपेक्षित हैं। इनमें फाजिलनगर का बकुलहर का घोड़धाप जहां बुद्ध ने विश्राम किया था। इसके अलावा पावानगर, वीरभारी, उस्मानपुर, कुकुत्था सहित कई ऐसे स्थल हैं। जिन पर पर्यटन विभाग की दृष्टि नहीं पड़ रही है। इनका विकास कर दिया गया तो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाएंगे।
करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले घोड़धाप का इतिहास विशिष्ट स्थलों में से एक माना जाता है। यहां प्राचीन पावा (बईरभआरई, उस्मानपुर) और ककुत्था (पुरैना घाट) के बीच तत्कालीन उत्तरापथ नटवा-नदवा बिशुनपुर के पूरब और ग्राम बेलवा कारखाना व बकुलहर गांव बसा है। इसके पास पश्चिम में सोनरा नाला है। इतिहासकार डाॅ. श्यामसुंदर सिंह ने बताया कि घोड़धाप प्राचीन व्यापारिक स्थल था। यहां ऐसा मार्ग था, जो भारत को पश्चिम से पूरब को जोड़ता था।
विज्ञापन

चीन से आने वाले इसी मार्ग पर तत्कालीन नगर जैसे ताम्रलिप्त-ई (बंगाल) अंग, चम्पा, मगध, नालंदा, बैशाली, हस्तिग्राम, जम्बूग्राम, आम्रग्राम, भोगनगर, चुंदस्थल, पावा, (वीरभारी व उस्मानपुर) घोड़धाप, ककुत्था (पुरैना घाट) कुशीनारा, अनुप्रिया, श्रावस्ती, मथुरा, कुरुक्षेत्र, तक्षशिला, गांधार (अफगानिस्तान) और मध्य एशिया आदि स्थित रहे हैं। महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर इसी रास्ते से यहां आए थे।
विज्ञापन

महात्मा बुद्ध गरिष्ठ भोजन करने के बाद जब बीमार पड़ गए, तो वे घोड़धाप में विश्राम किए थे। इसके बाद शिष्य आनंद से पानी मंगाकर पीये थे। इतने महत्वपूर्ण स्थान की उपेक्षा अब तक होती रही है। इस समय घोड़धाप गांव के पास भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा स्थापित किया गया है। यदि बेलवा कारखाना-धनहा से करीब एक किलोमीटर कच्ची सड़क को पक्की सड़क कर उसके दोनों किनारे फलदार वृक्ष और पांच हेक्टेयर में फैले तालाब को नौका विहार बना दिया जाय तो यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें