मंसाछापर। पडरौना कोतवाली के जंगल सिंघा पट्टी गांव के बांसी चौराहे पर आयुर्वेद क्लिनिक में प्रसव के मामले में बिहार के दहवा सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
स्टाफ नर्स को प्रसव कक्ष की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सीएचसी के अधीक्षक डॉ. आनंद कुमार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजेंगे।
आयुर्वेद क्लिनिक में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद कार्रवाई की जा रही है। आरोप है कि दहवा सीएचसी की स्टाफ नर्स बिहार के सीमावर्ती गांवों की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने के बजाय बांसी में संचालित क्लिनिक तक पहुंचाती थी और खुद प्रसव कराती थी।
इसके लिए वह अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल करती थी। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिलाकर निजी क्लिनिक में भेजा जाता था। कई मामलों में परिजनों को सरकारी अस्पताल की सुविधाओं के बारे में सही जानकारी नहीं दी जाती थी। इससे गरीब परिवार अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाने को मजबूर हो जाते थे। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जब क्लिनिक की गतिविधियां चर्चा में आईं तो स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया। जांच के दौरान स्टाफ नर्स की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए। इसके बाद उसे प्रसव कक्ष से हटाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने तक उसे प्रसव संबंधी जिम्मेदारियों से दूर रखना आवश्यक है।