तुर्कपट्टी। क्षेत्र के कई गांवों में दुर्गा पंडाल बनाने में सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की जा रही है। इन गांवों में नवरात्र के पर बनने वाले पांडाल और पूजा से लगायत प्रतिमा विसर्जन तक के सभी कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के लोग भी हिंदू भाइयों के साथ शामिल रहते हैं।
पूजा के लिए बनाई गई समितियों में भी मुस्लिम समुदाय लोग पदाधिकारी बन चंदा मांगने से लेकर पंडाल तैयार करने में श्रमदान करते हैं। इनमें युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी रहती है। तुर्कपट्टी क्षेत्र के महुअवां कारखाना गांव में नवदुर्गा पूजा समिति का गठन किया गया है।
यहां की समिति में करीब 20 सदस्य हैं, जिसमें आठ लोग मुस्लिम हैं। सबकी अलग-अलग जिम्मेदारी है। समिति का संचालन राकेश यादव करते हैं। 60 वर्षीय इस्लाम मियां के साथ मोह्मदीन अली बांस और बल्ली की व्यवस्था करने और पंडाल बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
इंताफ अली, जटहवां बाबा, शंभू चौधरी, डब्लू के जिम्मे पूजा की जिम्मेदारी है। शाम को होने वाले धार्मिक कार्यक्रम और माइक पर बोलने का कार्य कृष्णा के जिम्मे है। शाम की आरती में भी मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी रहती है। पड़ोसी गांव महासोन में हिंदू-मुस्लिम एकता कमेटी की ओर से कई वर्षों से दोनों समुदायों की ओर से आयोजन किया जाता है।
यहां आयोजन वर्ष से अब तक पंडाल बनाने का कार्य फुलेमान अली, नत्थू अली और जुमराती मियां करते रहे हैं। समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश तिवारी और अरविंद बाकी व्यवस्था करते हैं। यहां एक और दुर्गा समिति बनाई गई है। यह समिति गांव के प्राथमिक स्कूल पर पंडाल स्थापित करती है।
इस समिति में आरिफ अली, राजा हुसेन, अंशुमान त्रिपाठी, पप्पू सिंह, पंचू यादव, अखिलेश यादव आदि मिलकर दुर्गा पूजा मानते हैं। रात में प्रोजेक्टर पर रामायण और जय हनुमान सीरियल देखने के लिए मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों की संख्या काफी अधिक होती है।
इसी प्रकार के सामाजिक सौहार्द की स्थिति फुरसतपुर और लाला गुरवलिया गांव में भी देखने को मिलती है। यहां भी दोनों समुदाय के लोग आपसी भागीदारी से दशहरा मानते हैं।