पडरौना। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसका असर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी, इमरजेंसी और पैथोलॉजी विभाग में साफ दिखाई दे रहा है। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज और जांच के लिए पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड तक सभी बेड मरीजों से भरे हुए हैं। बढ़ती भीड़ के कारण मरीजों को इलाज और जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
शुक्रवार को फिजिशियन डॉ. धनंजय सिंह ने बताया कि लोग शुरुआती वायरल बुखार को सामान्य समझकर घरेलू उपचार या मेडिकल स्टोर से बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा ले रहे हैं। समय पर जांच और इलाज नहीं कराने के कारण कई मरीज टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पैथोलॉजी में सबसे अधिक जांच टाइफाइड की हो रही है।
उन्होंने सलाह दी कि हल्का बुखार, बदन दर्द या सिरदर्द होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या चिकित्सक से परामर्श लेकर जांच कराएं। बिना जांच के स्वयं दवा का सेवन न करें। उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीएं, खुले और बासी भोजन से परहेज करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। नारियल पानी, ओआरएस और ताजे फलों के रस का सेवन करें। साथ ही घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें।
इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक सभी बेड फुल
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के सभी 18 बेड मरीजों से भरे मिले। इनमें वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, सांस लेने में तकलीफ और खून की कमी से पीड़ित मरीज भर्ती थे। नए मरीजों के पहुंचने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेजा जा रहा था या जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा था। हालांकि जनरल वार्ड में भी सभी बेड पहले से भरे हुए थे।
ओपीडी में पहुंचे 1,520 मरीज
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1,520 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। बढ़ती मरीज संख्या के कारण रजिस्ट्रेशन से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक लंबी कतारें लगी रहीं। मरीजों को पर्ची बनवाने और चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। काय रोग विभाग में इलाज कराने पहुंचे शीला देवी, संगीता देवी, रविंद्र सिंह, हरिकेश कुमार, गिरिजेश प्रसाद और हरेराम सिंह ने बताया कि वे सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंच गए थे लेकिन दो घंटे बाद भी डॉक्टर के चैंबर तक नहीं पहुंच सके।
पैथोलॉजी में 536 मरीजों की जांच
पैथोलॉजी विभाग में भी शुक्रवार को 536 मरीज जांच के लिए पहुंचे। बढ़ती भीड़ के कारण जांच व्यवस्था प्रभावित रही। रजिस्ट्रेशन काउंटर, सैंपल कलेक्शन कक्ष और रिपोर्ट वितरण काउंटर पर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें लगी रहीं। अधिक भीड़ के चलते कई मरीजों को जांच रिपोर्ट लेने के लिए अगले दिन बुलाया गया।
मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर और सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कुछ घंटे निगरानी में रखकर इलाज किया जाता है। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें दवा और जरूरी सलाह देकर घर पर आराम करने के लिए भेजा जा रहा है।
- डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर