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Kushinagar News: कॉलेजों के गेट पर ही बिक रहा नशा, जिम्मेदार बेखबर

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बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के प्रवेश द्वार के पास संचालित गुटखे और नशीले पदार्थों की दुकान।संवाद
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पडरौना। जिले के स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तंबाकू व नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए शासन की ओर से सख्त निर्देश जारी हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के आसपास अब भी गुटखा, तंबाकू, सिगरेट और अन्य नशीले उत्पादों की दुकानें खुलेआम संचालित हो रही हैं। जिम्मेदार विभाग और संस्थान भी इस ओर से बेपरवाह नजर आ रहे हैं।
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शुक्रवार को पड़ताल में सामने आया कि बुद्ध पीजी कॉलेज के मुख्य गेट और चहारदीवारी से सटी दुकानों पर खुलेआम गुटखा, तंबाकू और सिगरेट की बिक्री हो रही थी। कॉलेज प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद रोकथाम के प्रभावी प्रयास नहीं दिख रहे हैं। इससे छात्र-छात्राओं के नशे की गिरफ्त में आने का खतरा बढ़ रहा है।



परिसर में गंदगी, बाहर नशे की दुकानें
कॉलेज परिसर के अंदर भी सफाई व्यवस्था बदहाल मिली। वाणिज्य संकाय और भंते सभागार के सामने जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दिए। वाणिज्य संकाय कार्यालय के ऊपर जाने वाली सीढ़ियों के कोनों में पान की पीक से दीवारें खराब हो रही हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन की ओर से रंगाई-पुताई और सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। वहीं, कॉलेज के प्रवेश द्वार और चहारदीवारी से सटी दुकानों पर गुटखा, तंबाकू, सिगरेट सहित अन्य नशीले उत्पादों की बिक्री जारी है।
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कॉलेज गेट और चहारदीवारी से गुटखा, तंबाकू, सिगरेट और नशीले पदार्थों की दुकानों को हटवाने के लिए प्रबंध समिति के सचिव के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर कार्रवाई की मांग की गई थी। जिलाधिकारी को भी मामले से अवगत कराया गया था लेकिन प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने से दुकानें अब भी संचालित हो रही हैं।
प्रो. विनोद मोहन मिश्र, प्राचार्य बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर


ढ़ाढ़ा में इंटर कॉलेज गेट के पास चल रही गुटखे की दुकान
हाटा। तहसील क्षेत्र के ढ़ाढ़ा में संचालित एक प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज के गेट के पास भी गुटखे की दुकान खुलेआम चल रही है। कॉलेज में हजारों छात्र-छात्राएं रोजाना स्कूल बस, साइकिल और निजी वाहनों से पहुंचते हैं। दुकानों पर बिक रहे गुटखा, तंबाकू और सिगरेट से बच्चों में नशे की लत पड़ने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

जागरूकता अभियान की जरूरत
जिले में कई सामाजिक संगठन सक्रिय हैं लेकिन शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने और जागरूकता फैलाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं दिख रहे हैं। इस दिशा में अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों के जिम्मेदारों को भी आगे आना होगा, तभी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

कम उम्र में नशे से बढ़ता है बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने से बच्चों में नशे की आदत तेजी से विकसित होती है। लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर, टीबी, हृदय और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका असर आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
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