संस्कृति और विरासत की रक्षक है संस्कृत : कुलपति
देश के विकास में संस्कृत का योगदान, विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी
महाविद्यालय परिसर में संकटमोचन हनुमान मंदिर का हुआ शिलान्यास
संवाद न्यूज एजेंसी
हाटा। श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय में शुक्रवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भूमि विकास बैंक के प्रदेश सभापति संतराज यादव ने की। यहां महाविद्यालय परिसर में संकटमोचन हनुमान मंदिर का शिलान्यास भी किया गया। संगोष्ठी में संस्कृत भाषा के कई विद्वानों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरूआत महाविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के हाथों संकटमोचन मंदिर के शिलान्यास से की गई। इसके बाद मां सरस्वती के चित्र पर दीप जलाकर किया गया। अतिथियों के स्वागत के बाद आयोजन समिति की ओर से उन्हें अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट किया गया। इस दौरान छात्रा वसुंधरा और वैष्णवी ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बतौर मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत ऐसी भाषा है, जो संस्कृति की वाहक है। अंग्रेजों को पता चल गया था कि बिना संस्कृत के अध्ययन के भारत की संस्कृति को नहीं समझा जा सकता है। इसलिए कोलकाता और काशी में संस्कृत विद्यालय की स्थापना की गई। भारतीय संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए संस्कृत भाषा की सुरक्षा आवश्यक है। सरकार भी संस्कृत भाषा की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। मुख्य वक्ता प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी ने कहा कि भारत में हजारों साल पहले भी लोग शास्त्र की जानकारी रखते थे। सत्य मार्ग पर चलते थे, कर्मनिष्ठ थे। संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान से भारत एक विकसित देश था। गुरुकुलों की रक्षा समाज करता था। आज शिक्षा के भेद ने अनेक विसंगतियों को जन्म दिया है। भारतीय संस्कृति की मजबूती का आधार संस्कृत भाषा है। भारत के विकास की कल्पना संस्कृत के विकास के बिना नहीं की जा सकती है। प्रो. शैलेश मिश्र ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कहा कि इस भाषा ने विभिन्न संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का काम किया है। कार्यक्रम में संतराज यादव, जगदीश पांडेय, अग्निवेश मणि, जयप्रकाश पांडेय, डॉ. रामसुभाष पांडेय, प्राचार्य राजेश चतुर्वेदी, संजय पांडेय, मोहन पांडेय, विनोद मणि, सतीश चंद्र शुक्ल आदि उपस्थित रहे।