बाघा चौर मे रात मे ठोकर की निगरानी करते बाढ़ खंड के अभियंता।स्रोत-सोशल मीडिया
तमकुहीरोड। एपी बांध के अहिरौलीदान और बाघा चौर स्थित दो ठोकरों पर गंडक नदी का दबाव लगातार बना हुआ है। अहिरौलीदान में किमी 13.980 पर बनी ठोकर का नोज करीब 15 से 20 मीटर तक धंस गया है और उसमें मोटी दरार पड़ गई है। अभी तक यहां बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ठोकर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं बाघा चौर में किमी 10.518 पर बनी ठोकर भी नदी की कटान से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड विभाग के अभियंता दिन-रात ठोकरों और तटबंध की निगरानी कर रहे हैं। सोमवार रात भी अभियंताओं की टीम ने बांध पर चौकसी की। विभाग की ओर से संवेदनशील स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था करने के साथ ही पर्याप्त मात्रा में जीओ बैग भी उपलब्ध कराए गए हैं। अहिरौलीदान के किमी 13.980 पर करीब 11.86 करोड़ रुपये की लागत से ठोकर का निर्माण कराया था। अब यह ठोकर गंडक नदी के निशाने पर है। नदी के दबाव से ठोकर के नोज का करीब 15 से 20 मीटर हिस्सा धंस गया है और उसमें बड़ी दरार पड़ गई है। ठोकर की स्थिति को लेकर आसपास के ग्रामीणों में बेचैनी है। उनका कहना है कि यदि ठोकर को और क्षति पहुंचती है तो नोनिया पट्टी, खैरखुटा समेत अहिरौलीदान क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने ठोकर की तत्काल मरम्मत और बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ठोकर का धंसना किसी बड़े खतरे की चेतावनी से कम नहीं है। हालांकि विभाग अभी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौके पर बचाव सामग्री का भंडारण किया गया है लेकिन बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। बाघा चौर में किमी 10.518 पर वर्ष 2024 में करीब 6.82 करोड़ रुपये की लागत से ठोकर का निर्माण कराया गया था।