खड्डा/तमकुहीरोड। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच जिले में स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। सोमवार को वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से नीचे आने से खड्डा क्षेत्र के छितौनी तटबंध पर राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर तमकुहीरोड क्षेत्र के एपी बांध पर करोड़ों रुपये की लागत से बने ठोकरों के क्षतिग्रस्त होने से कटान का खतरा गहरा गया है।
बाढ़ खंड के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे वाल्मीकिनगर बैराज से 1,02,100 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया था, जो दोपहर दो बजे घटकर 97,500 क्यूसेक और शाम चार बजे 99,800 क्यूसेक हो गया। इसके चलते भैसहा गेज स्थल पर शाम चार बजे जलस्तर 94.84 मीटर दर्ज हुआ, जो चेतावनी बिंदु से 16 सेंटीमीटर नीचे है।
डिस्चार्ज घटने से छितौनी तटबंध के ठोकर संख्या-1 और ए पर नदी की धारा का दबाव कम हुआ है।
एसडीओ संजय कुमार गौड की अगुवाई में टीम ने जाली में पत्थर भरकर सुरक्षा दीवार मजबूत की है, जिससे फिलहाल कटान का खतरा टल गया है। हालांकि, नेपाल के पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश को देखते हुए टीम लगातार तटबंध पर नजर बनाए हुए है।
दूसरी तरफ, तमकुहीरोड के एपी बांध पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सेवरही बाढ़ खंड द्वारा वित्तीय वर्ष 2020 में अहिरौलीदान स्थित किमी 13.980 पर 11.86 करोड़ की लागत से बनाए गए ठोकर के नोज का 15 से 20 मीटर हिस्सा तीन दिन पहले धंस गया और उसमें बड़ी दरारें आ गई हैं।
यहां अभी तक मरम्मत का काम शुरू न होने से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इसी प्रकार, बाघाचौर स्थित किमी 10.518 पर वर्ष 2024 में 6.82 करोड़ की लागत से बने ठोकर को भी नदी ने निशाना बनाया है, जिससे कई एकड़ गन्ने की फसल और ठोकर का अप-स्ट्रीम हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। कड़ी मशक्कत के बाद बाघाचौर में सोमवार को कटान थम गया, लेकिन दोनों स्थलों पर जोखिम बना हुआ है।।
अहिरौलीदान मे किमी 13.980 ठोकर की निगरानी करते अभियंता।संवाद- फोटो : 1