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Kushinagar News: किर्गिस्तान में नौकरी का वादा...कजाकिस्तान में फंसे कुशीनगर के चार युवक

Fri, 30 Jan 2026 02:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। किर्गिस्तान में अस्सी हजार रुपये महीने की नौकरी और सुनहरे भविष्य सपना दिखाकर कुशीनगर के एक एजेंट ने जिले के ही चार युवकों को अपने जाल में फंसा लिया। पहले नौकरी के नाम पर रुपये लिए फिर गलत तरीके से कजाकिस्तान की राजधानी अलमाटी में फंसाकर वहां से सुरक्षित वापसी के लिए भी रुपये ऐंठ लिए। अब न मिलता है, न ही फोन उठाता है।
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करीब चार महीने से चारों युवक वहां एक होटल मालिक के रहमोकरम पर शायद कभी वतन न लौट पाने के डर में एक-एक पल जी रहे हैं। दुखद यह कि वहां भारतीय दूतावास से संपर्क करने के बाद भी उन्हें अब तक सिर्फ आश्ववासन ही मिला है। इस बीच बृहस्पतिवार (29 जनवरी) को होटल मालिक ने सभी को जगह छोडने का अल्टीमेटम दे दिया, जिससे अब उनके सामने सड़क पर आने की स्थिति बन गई है। यहां कुशीनगर में भी उनका परिवार उनकी सलामती को लेकर परेशान है। उन्होंने अधिकारियों से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कार्रवाई की अपील की है।



तीन साल का वादा, दो महीने का वीजा

अहिरौली थाना क्षेत्र के चिलुआ गांव निवासी जितेंद्र सिंह (50) और सुनील गोंड (38), जबकि अमित कुमार (34) और रामानंद एक परिचित के मदद से बोदरवार के रहने वाले महादेव तिवारी के संपर्क में आए। उसने किर्गिस्तान में नौकरी दिलाने की बात कही। दो-दो लाख रुपये में बात हुई। एजेंट ने कहा कि करीब अस्सी हजार रुपये महीने मिलेंगे और तीन साल का वीजा होगा। सभी उसकी बातों में आ गए और इधर-उधर से रुपये की व्यवस्था कर महादेव को रुपये दे दिए। पर जब उन्हें वीजा मिला तो वह दो-दो महीने का ही मिला। रवानगी के दिन (जितेंद्र और सुनील 17 सितंबर, अमित और रामानंद 19 सितंबर) उन्हें मुबंई से कजाकिस्तान की राजधानी अलमाटी का टिकट मिला। उन्हें ये बताया कि अलमाटी से ही किर्गिस्तान जाना है।
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होटल में कराया काम, मजदूरी भी नहीं मिली

अलमाटी पहुंचने पर एजेंट के संपर्क से युवकों की मुलाकात अयोध्या निवासी एक व्यक्ति और एक पाकिस्तानी नागरिक उस्मान मोहम्मद से हुई। दोनों उन्हें एक होटल में ले गए, जहां करीब 15 दिन तक काम कराया गया, लेकिन न तो मजदूरी दी गई और न ही किर्गिस्तान भेजने की कोई प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान उनका दो महीने का किर्गिस्तान का वीजा भी अलमाटी में ही खत्म हो गया। हालांकि इस दौरान अमित को एक साल का न्या वीजा दे दिया गया जो अक्तूबर 2026 तक मान्य है पर उसे भी किर्गिस्तान भेजने की कोई पहल नहीं हुई। इधर, वे अलमाटी में ओवरस्टे हो गए। अभी वे उसी होटल मालिक के एक मकान में रह रहे हैं, जिसके यहां उन्होंने काम किया था। दिन में एक बार खाना मिलता है, जिसे खाकर किसी तरह दिन काट रहे हैं। युवकों का कहना है कि उन्हें लगातार सिर्फ आश्वासन दिया जाता रहा।


पासपोर्ट और रकम लेकर भी नहीं कराई वापसी

भारत लौटने की बात करने पर होटल मालिक ने जितेंद्र सिंह और सुनील गोंड के ओवरस्टे फाइन की रकम दो लाख टेंगे (कजाकिस्तानी मुद्रा) भरने का भरोसा दिलाया और दोनों के पासपोर्ट लेकर पाकिस्तानी उस्मान को दे दिए। उसके बाद से उस्मान गायब हो गया। युवकों का कहना है किअब उस्मान होटल मालिक का भी फोन नहीं उठा रहा। उधर, अमित और रामानंद के परिजनों ने अयोध्या निवासी एजेंट के साथी के खाते में उनकी वापसी के लिए 25-25 हजार रुपये भेजे पर उनकी भी वापसी अब तक नहीं हो सकी है।

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महादेव तिवारी नहीं, जसवंत सिंह, फर्जी पहचान से चला रहा विदेश भेजने का रैकेट
पडरौना। कुशीनगर के चार युवकों को कजाकिस्तान में फंसाने वाले कथित एजेंट महादेव तिवारी की असली पहचान जसवंत सिंह के रूप में सामने आई है। जब इन चारों युवकों की इससे मुलाकात हुई थी तब उसने अपना आधार इन्हें दिया था, जिस पर नाम महादेव तिवारी निवासी बोदरवार था। पर जब ये युवक अलमाटी पहुंचे तब उन्हें पता चला कि वह महादेव तिवारी नहीं जनुसूचित जाति का जसवंत सिंह है। जब पीडित युवकों के घरवाले उसके आधार के पते पर गए तो पता चला कि वह यहां नहीं रहता। गांववालों ने बताया कि उसे तलाश करते कई लोग अक्वसर आते हैं, जो विदेश में नौकरी के लालच में इसके चंगुल में फंसे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने फर्जी नाम और फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश में नौकरी दिलाने का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है। कजाकिस्तान में अयोध्या निवासी एक व्यक्ति और पाकिस्तानी नागरिक उस्मान मोहम्मद इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं। पहचान छिपाने के लिए जसवंत ने फर्जी आधार कार्ड बनवाया है।
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किर्गिस्तान भेजने की बात थी, अलमाटी में सड़क पर आने की नौबत आ गई

जितेंद्र सिंह ने कहा कि एजेंट ने कहा था कि तीन साल का वीजा मिलेगा और 80 हजार रुपये महीना कमाएंगे। अलमाटी पहुंचे तो बोला गया, यहीं ट्रेनिंग होगी। 15 दिन होटल में काम कराया, एक रुपये भी नहीं मिले।

सुनील गोंड ने कहा कि जब किर्गिस्तान भेजने की बात की तो टालते रहे। वीजा खत्म हो गया, तब डर लगने लगा। होटल मालिक ने पासपोर्ट और दो लाख टेंगे ले लिए, कहा फाइन भर दूंगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अमित कुमार ने कहा कि हमने दूतावास से भी संपर्क किया, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकला। अब न होटल में रहने दे रहे हैं, न हमारे पास पैसे बचे हैं। एक-एक पल डर में बीत रहा है। रामानंद ने कहा कि घर वालों को सच्चाई बताने में भी डर लगता है। सब सोच रहे थे हम विदेश में कमाने गए हैं, यहां तो भूखे रहने की नौबत है।
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