तमकुहीराज। गोरखपुर के गुलरिहा थाने में दर्ज डॉक्टरों के फर्जी डिग्री बेचने के मामले में आरोपी स्थानीय कस्बे के हरिहरपुर निवासी अलाउद्दीन पुलिस को लगातार चकमा दे रहा है। उसकी हरकतें पेशेवर अपराधी होने से नगर पंचायत के लोग अवाक है।
अलाउद्दीन व उससे जुड़े गुर्गों की धमक की वजह से सार्वजनिक रूप से कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं। सूत्रों की मानें तो रात में अलाउद्दीन घर पहुंच रहा है और सुबह निकल जा रहा है। तमकुहीराज पुलिस से इसकी नजदीकी बताई जा रही है। इसका सरगनाअलीगढ़ में बैठा है, जिसके इशारे पर आरोपी पुलिस को नचा रहा है।
अलाउद्दीन की पकड़ इतनी गहरी है कि 17 मई को मामला दर्ज होने के करीब तीन महीने बाद स्थानीय स्तर पर लोगों को उसके करतूतों की जानकारी हुई। मामला तब खुला जब 11 अगस्त को पहली बार गोरखपुर पुलिस टीम अलाउद्दीन के घर पहुंची। हालांकि टीम के पहुंचने से पहले ही सूचना लीक कर दी गई और वह घर से गायब हो गया था। गोरखपुर पुलिस ने तमकुहीराज पुलिस के ऊपर प्राथमिक सूचना लीक करने का भी आरोप लगाया था, इसके बाद तमकुहीराज पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी।
गोरखपुर पुलिस की टीमें कई बार अलाउद्दीन की तलाश में उसके घर व संभावित ठिकानों पर दबिश दे चुकी है, लेकिन उसे गिरफ्तार करने में असफल रही है। अलाउद्दीन को किसी भी सीमा तक जा कर बचाने वाले लोग समूचे इलाके में सक्रिय है। पुलिस महकमे के अलावा राजनीतिक गलियारों में विपक्ष व सत्ता पक्ष में इसके शरणदाता मौजूद है। जरूर के मुताबिक अलाउद्दीन इनका इस्तेमाल पुलिस और जिम्मेदारों पर दबाव बनाने के लिए करता रहता है। इसीलिए गोरखपुर पुलिस की घेराबंदी का उसके ऊपर खास असर नहीं है। स्वास्थ्य महकमे की बारीकियां सिखाने वाला अलाउद्दीन का गुरु अलीगढ़ में बैठकर पुलिस को चकमा देने के टिप्स दे रहा है।
मदद के लिए लखनऊ, दिल्ली, नोयडा, प्रयागराज सहित विभिन्न शहरों का दौड़ लगा चुका अलाउद्दीन पुलिस के लिए सिरदर्द बना है। स्वास्थ्य विभाग में मजबूत पकड़ के कारण अलाउद्दीन तमकुहीराज कस्बे के हाईवे के समीप बिना रजिस्ट्रेशन के निजी अस्पताल संचालित करता रहा। 12 सितंबर को तत्कालीन डीएम के सख्ती पर स्वास्थ्य विभाग ने तमकुहीराज पहुंची और निजी अस्पताल को सील कर कोरम पूरा कर लिया। 19 सितंबर को अलाउद्दीन गोरखपुर स्थित न्यायालय में सरेंडर करने की फिराक में था, लेकिन गोरखपुर के सिटी एसपी अभिनव त्यागी के अगुआई में कई थानों की पुलिस के न्यायालय के आसपास डेरा डालने के कारण उसके मंसूबे पूरे नहीं हो सके। इसके बाद कोर्ट ने गैरजमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया तो पुलिस 15 और 25 हजार रुपये तक का इनाम घोषित कर चुकी है।
सूत्रों की मानें तो वर्तमान में अलाउद्दीन की गतिविधियों का केंद्र तमकुहीराज कस्बे और बिहार के सीमावर्ती इलाके हैं।