तमकुहीराज। इंटर कॉलेज गौरीनगर में बृहस्पतिवार क़ो काव्य गोष्ठी हुई। कवि नंदलाल विद्रोही की कविताओं पर छात्रा-छात्राओं ने खूब तालियां बजाईं। नंदलाल विद्रोही ने अपनी रचना ...पापा की परी होती हैं बेटियां..., क्यों मरते हो क्षणभंगुर मुस्कान पर, मरना ही है तो मरो धरती की छाती चीरते किसान पर।
देश की सीमा रक्षक जवान पर, बार-बार हजार बार मर विद्रोही अपने प्यारे वतन हिंदुस्तान पर ...आदि पेश कर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा ...जहां बरगद और पीपल की छांव नहीं है, तो समझ ले विद्रोही हुआ तेरा गांव नहीं है... सुनाया।
बेटियों की मांग पर विद्रोही ने ...आपकी परी को पर लगे, जहां रहे लक्ष्मी का घर लगे। सब बेटियां वरदान बनें, इन्हीं के बूते अपना हिंदुस्तान बने... पर खूब तालियां बजीं। भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए उन्होंने -खुद्दार को गद्दार लिख रहा है, नफरत को प्यार लिख रहा है... सुनाकर सोचने पर विवश किया। इस दौरान प्रधानाचार्य भूआल कुशवाहा, भिखारी प्रसाद, मोतीलाल खरवार, भूखल प्रसाद, जयप्रकाश कुशवाहा आदि मौजूद रहे। संवाद