फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर साल लगते हैं पौधे, फिर भी हरियाली नहीं बढ़ती

विज्ञापन
चतुर छपरा-भेड़ी जंगल मार्ग पर भी लगाए गए थे पौधे, अब नहीं दिखता कोई पौधा। - फोटो : KUSHINAGAR
विज्ञापन
हर साल लगते हैं पौधे, फिर भी हरियाली नहीं बढ़ती
विज्ञापन

वन विभाग को एक पौधे की सुरक्षा के लिए मिलते हैं 80 रुपये
पडरौना। धरती को हराभरा और पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए जिले में हर वर्ष वन विभाग जुलाई में लाखों पौधे लगवाता है। इस पर लाखों रुपये भी खर्च होते हैं। देखभाल के लिए एक पौधे पर 80 रुपये मिलते हैं। इसके बावजूद आधे से अधिक पौधे देखरेख और सुरक्षा के अभाव में सूख जाते। जनपद में तीन वर्षों में 31,51,607 पौधे लगाए गए, लेकिन कई जगह पौधों का निशान तक नहीं रह गया है।
वन विभाग की मानें तो अकेले वह 11 लाख पौधे लगाता है। इसके बाद ग्राम्य विकास विभाग भी सर्वाधिक पौधे लगवाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रेलवे, पुलिस सहित अन्य विभागों को भी पौधरोपण का लक्ष्य मिलता है। पिछले साल जुलाई में 28 लाख 85 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य था। उस लक्ष्य के सापेक्ष 31 लाख 55 हजार पौधे लगाए गए थे।
विज्ञापन

वन विभाग की लापरवाही खड्डा तहसील क्षेत्र के मिश्रौली से दरगौली मार्ग के दोनों लेन पर देखी जा सकती है। वहां वर्ष 2020 में पांच हेक्टेयर भूमि पर 5,500 पौधे लगाए गए थे। उनमें से फलदार 1,100, इमारती और 4,400 पौधे थे। इनमें से अधिकतर पौधे सूख चुके हैं। वर्ष 2021 में चतुर छपरा से भेड़ी जंगल मार्ग पर छह हेक्टेयर भूमि पर 6,600 पौधे लगाए गए थे। उनमें से फलदार 1,320 तथा इमारती 5,280 पौधे थे। एक भी पौधा मौके पर दिखाई नहीं दे रहा है।
वन विभाग ने वर्ष 2019 में हाटा तहसील क्षेत्र के मिश्रौली-बरसैना सड़क मार्ग के दोनों लेन के पांच हेक्टेयर भूमि पर 5,500 पौधे लगाए गए थे। इनमें फलदार 1,100 इमारती और 4,400 पौधे थे। इस गांव के राजेंद्र सिंह, गोरख सिंह, जयराम यादव, अजय यादव, इश्तेयाक अंसारी ने आरोप लगाया कि वन विभाग ने कागज में ही पौधरोपण कर दिया है। जिस जगह पौधे लगाए गए हैं, वहां पौधे देखभाल के अभाव में सूख रहे हैं। वर्ष 2021 में भुुजौली गांव के पास नहर के किनारे सात हेक्टेयर भूमि पर 7,700 पौधे रोपे गए थे। वर्ष 2020 में कुंदूर से बड़हरा मार्ग पर नौ हेक्टेयर भूमि पर 9,900 पौधे लगाए गए। इसमें फलदार 1980 एवं इमारती 7920 पौधे लगाए गए थे। इसमें से अधिकतर पौधे सूख गए हैं।
वर्ष 2019 में तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के दशहवा के पास सात हेक्टेयर भूमि पर 7,700 पौधे लगाए गए थे। इनमें फलदार 1,540 एवं 6,160 इमारती पौधे लगाए गए थे। परसौनी गांव में छह हेक्टेयर भूमि पर 6,600 पौधे लगाए गए। तमकुहीराज नहर की आठ हेक्टेयर भूमि पर 8,800 पौधे लगाए गए। वन विभाग की लापरवाही के कारण अधिकतर पौधे सूख गए हैं। जो बचे हैं, वह सूखने के कगार पर हैं।
हर वर्ष लगाए जाने वाले पौधों की बढ़ती गई संख्या
वर्ष 2019 में 857.86 हेक्टेयर भूमि पर 940,900 पौधे लगाए गए। उसमें से फलदार 1,88,180 व इमारती 7,52,720। वर्ष 2020 में 971 हेक्टेयर भूमि पर 10,63,407 पौधे लगाए गए। उसमें से फलदार 2,12,681 व इमारती 8,50,726 पौधे शामिल हैं। वर्ष 2021 में 1,043 हेक्टेयर भूमि पर 1,147,300 पौधे लगाए गए। उसमें से फलदार 2,29,460 एवं इमारती 9,17,840 पौधे थे, लेकिन अधिकतर पौधे सूख गए हैं।
सूखने वाले पौधे
फलदार में आम, इमली, बेल, जामुन, कटहल, अमरूद। इमारती पौधों में सागौन, शीशम, अर्जुन, खैर आदि पौधे सूख गए हैं।
दैनिक श्रमिकों का मानदेय 5,226 रुपये
डीएफओ के मुताबिक पौधों की देखभाल के लिए दैनिक श्रमिकों (वन श्रमिक) को 5,226 रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रत्येक के जिम्मे आठ हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधों की देखभाल करनी होती है। जनपद में लगभग 150 दैनिक श्रमिक हैं।
विज्ञापन

वर्जन
पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी वन सुरक्षा श्रमिकों को दी जाती है। लापरवाही श्रमिकों पर कार्रवाई की जाएगी। जहां पौधे सूख गए हैं, वहां दोबारा पौधे लगाए जाएंगे।
अनिल कुमार श्रीवास्तव, डीएफओ, कुशीनगर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें