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यूपी की एक हजार एकड़ जमीन पर बिहार के लोगों का कब्जा

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खड्डा क्षेत्र के महादेवा व बिहार के भैंसहिया रेता की सीमा पर लगा खंभा। - फोटो : KUSHINAGAR
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यूपी की एक हजार एकड़ जमीन पर बिहार के लोगों का कब्जा
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पडरौना (कुशीनगर)। यूपी-बिहार सीमा पर बाल गोविंद छपरा मौजा में एक हजार एकड़ जमीन पर बिहार के लोगों ने कब्जा कर लिया है। कब्जा रोकने के लिए चार महीने पहले एसडीएम ने जमीन पर बोई फसल जब्त की थी, लेकिन कब्जेदार फसल काट ले गए। दो दिन पहले एसडीएम खड्डा ने बगहा के एसडीएम व एसपी के अलावा पश्चिमी चंपारण के डीएम से मिलकर हालात की जानकारी दी थी। मंगलवार को डीएम एस. राजलिंगम व एसपी विनोद कुमार सिंह बालगोविंद छपरा पहुंचे। उन्होंने कब्जा हटाने के निर्देश दिए।
गंडक नदी कुशीनगर जिले में यूपी और बिहार प्रांत के बीच सीमा रेखा का काम करती है। नदी के दियारा क्षेत्र में दोनों प्रांत के लोगों की खेती है। वैसे तो अगल-बगल स्थित यूपी-बिहार के गांवों में रिश्तेदारी भी है, लेकिन जमीन का यह मामला विवाद का विषय बन गया है। कुशीनगर की खड्डा तहसील व पश्चिमी चंपारण के बगहा अनुमंडल (तहसील) के बीच दोनों प्रदेशों के सीमा का निर्धारण वर्ष-2010 में दोनों तरफ के डीएम की सहमति पर किया गया था। राजस्व विभाग तथा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जंगल के वन विभाग की संयुक्त टीम ने 6 जून 2011 से लगभग दस दिनों तक 17.25 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए नक्शा के अनुसार जमीन की पैमाइश की थी। इसके लिए बिहार प्रांत की ओर से उपलब्ध कराए गए वर्ष 1914-15 के नक्शे को आधार बनाया गया था। वर्ष 2013 में कुशीनगर जिला प्रशासन ने पैमाइश के आधार पर खंभे लगवाए थे।
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खड्डा क्षेत्र का मरचहवा, बालगोविंद छपरा, शाहपुर, बिंध्याचलपुर, विशेषरपुर, मथुरा छपरा, सालिकपुर, महदेवा आदि गांव बिहार सीमा के नजदीक बसे हैं। सीमांकन के बाद दोनों प्रांत के अधिकारियों ने लोगों से एक-दूसरे क्षेत्र की जमीन से कब्जा छोड़ने को कहा था। तब यह मान लिया गया था कि विवाद समाप्त हो गया। यूपी क्षेत्र के लोगों ने बिहार प्रांत की जमीन पर कब्जा छोड़ भी दिया, लेकिन बिहार प्रांत के नौरगिया गांव के लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा।
मरचहवा कांड के बाद दुरुस्त कराया गया नक्शा
मार्च 1989 में वर्चस्व व जातीय संघर्ष को लेकर मरचहवा गांव में जंगल पार्टी के डकैतों ने 14 ग्रामीणों को लाइन में खड़ा करके गोली मार दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने मरचहवा गांव पहुंचकर जमीन का रिकार्ड सही कराने की घोषणा की थी। करीब 20 वर्षों तक चली प्रक्रिया के बाद रिकार्ड दुरुस्त करते हुए अभिलेख तहसील को वापस हुआ। बालगोविंद छपरा मौजा भैंसहां ग्राम पंचायत का हिस्सा है। यह मौजा बिहार प्रांत के नौरंगिया गांव व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। नौरगिया गांव के करीब 250 लोग नदी खाते की सरकारी जमीन व काश्तकारी मिलाकर करीब एक हजार एकड़ भूमि पर काबिज हैं।
बीते साल 10 अक्तूबर को जब्त हुई थी जमीन
जमीन पर कब्जे के इस मामले में मौका मुआयना करने एसडीएम खड्डा अरविंद कुमार व तहसीलदार डॉ. एसके राय बीते साल 10 अक्तूबर को बालगोविंद छपरा पहुंचे थे। मौके की नवैयत को देखते हुए एसडीएम ने सीआरपीसी की धारा 145/146 के तहत विवादित एक हजार एकड़ जमीन व फसल को जब्त करते हुए रिसीवर नियुक्त कर दिया था। उन्होंने आदेश दिया था कि जमीन का मालिकाना हक निस्तारित हुए बिना फसल नहीं काटी जाएगी, लेकिन कब्जेदारों ने न केवल फसल काट ली, बल्कि अगली फसल भी बो दी। यही नहीं, उन्होंने झोपड़ी डालकर भौगोलिक परिदृश्य भी बदलने का प्रयास किया।
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कोट
यूपी-बिहार सीमा पर एक हजार एकड़ जमीन पर कब्जा है। इस जमीन को जब्त किया गया है। कब्जा हटवाने के लिए पश्चिमी चंपारण के डीएम व एसडीएम बगहा के अलावा एसपी बगहा को भी पत्र भेजा गया है। मंगलवार को डीएम व एसपी ने संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण किया था। कब्जा खाली कराकर वास्तविक किसानों को कब्जा दिलाया जाएगा।
- अरविंद कुमार, एसडीएम, खड्डा
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