वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ी
990 वर्ग किलोमीटर में फैला है वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
खड्डा (कुशीनगर)। जनपद की सीमा से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि तो हुई है, लेकिन इनके जान पर खतरा भी बढ़ा है। इसी माह एक मादा बाघ की मौत हुई है। कभी शिकारियों के जाल में फंसकर तो कभी आपसी संघर्ष में इनकी मौत हो रही है। कई बार बाघ जंगल से निकलकर आबादी में आकर दहशत फैला चुके हैं।
जनपद से सटा बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 990 वर्ग किमी में फैला है। वीटीआर के अधिकारियों की मानें तो इसमें बाघों की संख्या बढ़ रही है। यह पर्यावरण प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है, लेकिन चिंता की बात यह है कि बाघों की मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। पश्चिमी चंपारण (बेतिया) अंतर्गत आने वाले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल को दो प्रमंडल एक व दो में बांटा गया है। यह जंगल नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान व पड़ोसी जनपद महराजगंज के सोहगीबरवां वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शावकों सहित बाघों की संख्या 50 होने की उम्मीद की जा रही है। इनकी गणना वर्तमान में टैप कैमरे से की जा रही है। विभाग के मुताबिक वर्ष 2010 में बाघों की संख्या घटकर मात्र आठ रह गई थी।
21 बाघों की हो चुकी है मौत
पांच जनवरी 2022 को आठ माह के मादा शावक का शव भारत-नेपाल सीमा के पास वीटीआर के कौलेसर नामक स्थान पर मिला था। वन विभाग ने शव को बरामद किया था। कयास लगाया गया कि आपसी संघर्ष में शावक की मौत हो गई होगी। 13 अक्तूबर 2021 को एक बाघ की मौत हुई थी। उससे पहले फरवरी 2021 में एक बाघिन की मौत हो गई थी। जनवरी 2021 में शिकारियों के लगाए तार में फंसकर एक बाघ की मौत हो गई थी। वर्ष 2018-19 में दो बाघों की मौत हुई थी। आरोप है कि वर्ष 2015-16 में जंगल के गोनौली क्षेत्र में शिकारियों ने जहर देकर चार बाघों को मार डाला था। वर्ष 2014 में दो बाघों की जान गई थी। वर्ष 2012-13 में यूपी-बिहार सीमा पर ट्रेन से कटकर एक बाघ की मौत हुई थी। वर्ष 2010 में दो बाघों की मौत हुई थी। वर्ष 2007, 2008 और 2009 में एक-एक बाघ की मौत हुई थी। विभाग के मुताबिक ढिाई दशक में इस जंगल में लगभग 21 बाघों की मौत विभिन्न कारणों से हुई है।
‘बाघों की मौत की कराई जाती है जांच’
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के संरक्षक सह निदेशक हेमकांत राय ने बताया कि बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो शुभ संकेत है। बाघों की आपसी लड़ाई व प्राकृतिक एवं अन्य कारणों से मौत होने पर उसकी जांच की जाती है। इसके बाद पूरी एहतियात बरती जाती है कि बाघ सुरक्षित रहें।