प्रियांशु की मौत के बाद रोते-बिलखते परिजन। स्रोत-सोशल मीडिया
पडरौना/नेबुआ नौरंगिया। कोटवा बाजार में अनन्या पाली क्लीनिक एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में तीन दिन से भर्ती 13 माह के बच्चे की इलाज के दौरान शनिवार को दोपहर में मौत हो गई। नाराज परिजन बच्चे का शव अस्पताल के बाहर रखकर हंगामा करने लगे।
दो घंटे बाद पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गया। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद इसे जिंदा बताकर अपनी वाहन से गोरखपुर लेकर संचालक जा रहे थे और रास्ते में उतारकर भागने लगे। वहीं थाने गेट पर मौजूद एक दलाल मैनेज करने में देर शाम तक जुटा रहा।
हनुमानगंज थाना क्षेत्र के बोधी छपरा निवासी छोटू साहनी की पत्नी रक्षाबंधन पर अपने मायके नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के खानूछपरा में 13 माह के बेटे प्रियांशु के साथ आई थी। उसको तेज बुखार होने पर मां परिजन उसे लेकर नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के कोटवा कला बाजार में विशुनपुरा रोड पर संचालित अनन्या पाली क्लीनिक एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में तीन दिन पूर्व पहुंचे।
डॉक्टर ने बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि शनिवार को दिन में करीब एक बजे अचानक बच्चे की आंख बंद हो गई। अस्पताल संचालक से परिजनों ने इसकी जानकारी दिया तो वह बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए रेफर कर दिया और अपनी निजी कार से उसे गोरखपुर के लिए लेकर चल दिया। रास्ते में बच्चे और परिजनों को उतारकर भागने का प्रयास किया। इस पर परिजन हंगामा करने लगे और संचालक को पकड़ लिया।
इसके बाद संचालक अस्पताल पर लेकर आया और दलालों की मदद से मामले को मैनेज करने का प्रयास करने लगे। परिजन बच्चे का शव अस्पताल के बाहर रखकर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। करीब तीन घंटे बाद नेबुआ नौरंगिया पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि तीन दिन में 50 हजार से अधिक रुपये खर्च हो गया है। तीन यूनिट खून भी डॉक्टर ने चढ़ाया। इलाज में लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है।
थानाध्यक्ष दीपक कुमार सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। तहरीर मिलने पर अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं अस्पताल संचालक चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि इलाज में लापरवाही नहीं हुई है। गोरखपुर लेकर जाते समय बच्चे की मौत हुई है। परिजनों का आरोप निराधार है।