पडरौना। ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ ही सूर्य के तेवर तल्ख हो गए हैं। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश करते ही 'नौतपा' की शुरुआत हो गई है। पहले दिन पारा 41 डिग्री को पार गया। आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि होने की आशंका है। सुबह के आठ बजते ही सूरज की किरणें आग उगलने लगी हैं। दोपहर होते-होते सड़कों पर चहल-पहल काफी कम हो जा रही है। इसी बीच बिजली की कटौती ने जीना मुहाल कर दिया है।
एक तरफ जहां आसमान से बरस रही आग ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग की तरफ से तय शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं मिलने से लोग बिलबिला हैं। गर्मी का ग्राफ बढ़ते ही बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ओवरलोडिंग और ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घंटों अघोषित बिजली कटौती हो रही है। रात के समय बिजली गुल होने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगाें का कहना है कि रात में रोस्टरिंग के नाम पर हर 30 मिनट पर कटौती की जा रही है।
शहर में 24 व ग्रामीण इलाके में 18 घंटे की आपूर्ति का निर्धारित शेड्यूल पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं, बिजली निगम का दावा है कि बेहतर आपूर्ति के लिए जरूरी संसाधन पूरे हैं,कहीं पर कोई दिक्कत सामने आने पर समय से मरम्मत व बदलकर उसे ठीक करा दिया जा रहा है। सुचारु बिजली के लिए कार्यशाला में 10, 16, 25, 63 व 10 केवीए 27 ट्रांसफाॅर्मर उपलब्ध हैं। प्रतिदिन छह ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की जा रही है। जबकि दो ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए आने का अनुपात करीब दो ट्रांसफार्मरों का है। अब तक मई महीने में 65 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की जा चुकी है। ऐसे में निगम बिजली आपूर्ति को लेकर अलर्ट मोड में है, फिर भी परेशानी कम नहीं हो रही है। वहीं, कसया वर्कशॉप में मई में अब 185 जले ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए आए हैं। 150 की मरम्मत की जा चुकी है। बचे 33 की मरम्मत की जा रही है। अप्रैल में 70 जले थे। सबकी मरम्मत की गई। मौजूदा समय में तीन-चार जले ट्रांसफार्मर आ रहे हैं। जेई ललित मोहन चतुर्वेदी ने बताया कि लाइट जाने के बाद घरों के स्विच ऑफ कर दिए जाएं तो ट्रांसफार्मर जलने की संख्या में कमी आ सकती है।
गर्मी के साथ रुला रही बिजली :
सुकरौली क्षेत्र के रामप्रवेश यादव, रमायन कुशवाहा, रविंद्र जायसवाल, मुन्ना मिश्रा, सुरेश पासवान, मनोज मिश्र,गोविंद तिवारी आदि ने कहा कि दिन में तो आपूर्ति ठीक रहती है,लेकिन शाम 7:0 बजे से पूरी रात भर हर आधे-आधे घंटे में रोस्टरिंग के नाम पर कटौती से रात में सो नहीं पा रहे हैं। कसया नगर में भी बिजली ठीक नहीं है। जबकि यहां विभागीय उच्च अधिकारी भी रहते हैं। बीते दिनों ट्रांसफार्मर जलने से 24 घंटे तक लोग बिना बिजली के ही किसी तरह गर्मी का सामना करते रहे। यही हाल कप्तानगंज, खड्डा, रामकोला, तमकुहीराज, दुदही, पडरौना सहित ग्रामीण इलाकों का है।
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डायरिया और बुखार के मामले बढ़े
गर्मी के चलते मौसमी बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सोमवार दोपहर 12:25 बजे तक कुल 1503 मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच चुके थे। इनमें सर्वाधिक संख्या डायरिया और बुखार से पीड़ित मरीजों की रही।
गौरतलब है कि पारा के ग्राफ में वृद्धि को देखते हुए मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के पास आठ बेड का हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार किया गया है। लेकिन अब तक लू (हीट स्ट्रोक) का कोई भी मरीज भर्ती नहीं है। एहतियात के तौर पर बुखार से 10 मरीजों को वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। मौजूदा समय में डायरिया के 30 मरीज भर्ती हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। गर्मी का असर नवजातों और बच्चों पर दिखाई दे रहा है। एनआईसीयू में 41 नवजात भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, इन बच्चों में सबसे ज्यादा मामले पीलिया व संक्रमण और तेज बुखार के हैं।
गंभीर मरीजों के लिए 10 बेड का अलग इमरजेंसी वार्ड भी सक्रिय किया गया है। सोमवार दोपहर 12:10 बजे तक डायरिया और बुखार के 13 नए मरीज आए थे। मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में पहले से भर्ती मरीजों की हालत में सुधार होने पर सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है।
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44 डिग्री तापमान वृद्धि की संभावना, बचाव के दिए सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के प्रभारी डा. पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि दो जून तक अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस की आशंका है। न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री रह सकता है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच पराबैंगनी किरणों का प्रभाव और थर्मल सूचकांक अधिक रहेगा, इसलिए बहुत जरूरी न हो तो इस दौरान खुले में निकलने से पूरी तरह परहेज करें। उन्होंने इस तरह के मौसम में बचाव सहित जरूरी सलाह दिया है।
- प्यास न लगी हो, तब भी लगातार पानी, ओआरएस घोल, मट्ठा, नींबू पानी या आम का पन्ना पीते रहें।
- दोपहर के समय लंबी दूरी की यात्रा या खुले वाहनों (जैसे बाइक, साइकिल) पर सफर करने से बचें।
- बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, सिर को गमछे व टोपी से ढकें और चश्मे का प्रयोग करें।
- खेतों में काम करने वाले किसान और निर्माण कार्य में लगे मजदूर सुबह जल्दी या शाम के वक्त ही काम निपटाएं। दोपहर की धूप में शारीरिक श्रम करने से बचें।
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