पडरौना। नगर के बाजार और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के समुचित इंतजाम नहीं हैं। वहीं शहर के कई मोहल्ले संकरी गलियों में बसे हैं, जहां अग्निशमन विभाग की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। उधर शहर में काफी पहले लगे हाईडेंट ऊंची सड़कों के नीचे दब गए हैं। ऐसे में यदि शहर के किसी भी मोहल्ले में आग लग जाए तो उसे बुझाना विभाग के लिए चुनौती होगी। रविवार को भोर में बस्ती जिले के हरैया कस्बा के अंजहिया बाजार के एक घर के तीसरे मंजिल में लगी आग से दम घुटन से मां और दो बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे में पति की हालत गंभीर बताई जा रही है। यदि शहर के कुछ मोहल्लों में आग लगने की घटना हो तो यहां भी बस्ती जैसी घटना होने से कोई रोक नहीं पाएगा, क्योंकि पडरौना नगर का गुदरी बाजार शहर का ऐसा बाजार है, जहां लोगों के दैनिक जरूरतों के सभी सामान मिलते हैं।
यहां शहर के अलावा आसपास गांवों और बिहार तक के लोग हर दिन बाजार करने आते हैं। यहां खरीदारों की सुबह से देर शाम तक भीड़ रहती है। यहां की गलियां और मुख्य मार्ग इतना संकरा है कि वहां सामान्य तौर पर एक साथ दो बाइक नहीं पहुंच सकती हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभग की गाड़ी पहुंचने में मुश्किल होगी।
यही हाल शहर के कसेरा टोला, छावनी, साहबगंज, इंदिरानगर, नौका टोला, गांधीनगर, मुन्ना कॉलोनी आदि मुहल्लों की सड़कें भी बेहद संकरी हैं। यदि इन मुहल्लों में किसी भी वजह से आग लग जाए तो उससे निपटने के लिए अग्निशमन विभाग को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
कागज में होती है रीफिलिंग
बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से संचालित परिषदीय और प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। विद्यालयों में आग लगने पर बचाव के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र विद्यालयों की आलमारी में बंद पड़े धूल फांकते मिले। इनके लिए होने वाली जांच बस कागजी खानापूर्ति तक ही सिमटकर रह गई। ऐसे में अगर विद्यालयों में आग लग जाए तो मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। प्रत्येक विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट की धनराशि में 1500 रुपये अग्निशमन यंत्र की रीफिलिंग के लिए मिलता है, लेकिन इनकी रीफिलिंग बस कागज में ही होती है।
एक वर्ष तक प्रभावी रहती है रीफिलिंग
अग्निशमन यंत्रों (सिलिंडरों) को सक्रिय बनाए रखने के लिए इन्हें हर साल रीफिल कराया जाना चाहिए, क्योंकि इन यंत्रों के अंदर भरा केमिकल केवल एक वर्ष तक ही प्रभावी रहता है। इसके बाद इसमें भरा केमिकल पाउडर बन जाता है, जो आग बुझाने में प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाने के दौरान आग लग जाए तो उस पर काबू नहीं पाया जा सकता।