पांच हजार से अधिक बच्चे अतिकुपोषित, फिर भी एनआरसी नहीं पहुंच रहे मासूम
- जनपद में 5338 बच्चे हैं अतिकुपोषित
- जिला अस्पताल के एनआरसी में संचालित होता है पोषण एवं पुनर्वास केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले में अतिकुपोषित बच्चों की तादाद पांच हजार से अधिक है। इसके बावजूद कुपोषण से बचाने के लिए शासन स्तर पर सुविधाएं मुहैया कराने पर भी इसका समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसी ही एक बानगी जिला अस्पताल में देखने को मिल सकती है, जहां कुपोषित बच्चों के समुचित इलाज और देखभाल के लिए बने पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद ऐसे बच्चे नहीं पहुंच पा रहे हैं।
पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन कर उनमें कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग की तरफ से पांच वर्ष तक के 359938 बच्चों का सर्वे कराया गया है। इसमें 19864 कुपोषित और 5338 बच्चे अति कुपोषित मिले हैं। ऐसे बच्चों को 15 दिनों तक भर्ती रखकर उनके समुचित इलाज और देखभाल के लिए जिला अस्पताल में दस बेड का पोषण एवं पुनर्वास केंद्र बना है, लेकिन जागरुकता की कमी के वजह से हर माह पांच से 10 अथवा 15 बच्चों का ही उपचार हो पा रहा है। जबकि इस केंद्र की विशेषता यह है कि चिह्नित किए गए कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को यहां भर्ती किया जाता है। उनके साथ उनकी मां अथवा परिवार के किसी एक सदस्य का भोजन और रहना मुफ्त रहता है। 15 दिन तक डॉक्टरों की देखरेख में न केवल इनका उपचार होता है, बल्कि कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की देखभाल, पौष्टिक आहार देने साथ-साथ अन्य तौर-तरीकों से भी परिचित कराया जाता है। ऐसे बच्चों को अस्पताल से छुट्टी देने के बाद भी दो माह तक उनकी नियमित निगरानी कह जाती है, लेकिन इसका लाभ ले पाने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है।
जागरुकता की कमी के कारण कम बच्चे ही आ रहे एनआरसी में-
एनआरसी में भर्ती कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की संख्या पर नजर डालें तो इस साल जनवरी में पांच, फरवरी में 12, मार्च में 16, अप्रैल में पांच, मई में शून्य, जून में आठ, जुलाई में चार, अगस्त में सात, अक्तूबर में 12 और नवंबर में 15 बच्चे भर्ती हुए हैं। जबकि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से कराए गए सर्वे के अनुसार शून्य से पांच वर्ष तक के 359938 बच्चे हैं। इनमें 323856 बच्चों का वजन कराया गया तो 281285 सामान्य, 28775, मध्यम अल्प वजन, 7599 गंभीर अल्प वजन वाले पाए गए। इसमें 19864 को कुपोषित और 5338 को अति कुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा गया है।
शारीरिक रूप से ऐसे कुपोषित या अतिकुपोषित बच्चे, जिनकी हालत ठीक नहीं होती है, उनका वजन कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संबंधित एएनएम को सूचना देती हैं। इसके बाद एएनएम की सूचना पर डॉक्टर उस बच्चे की जांच करते हैं। चिकित्सकीय जांच के बाद यदि बच्चा पुनर्वास केंद्र में भर्ती के लायक होता है तो उसे सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा जाता है। इसके लिए विभाग की तरफ से पूरी तरह सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा टीकाकरण अथवा अन्य कार्यक्रम के दौरान लोगों को जागरुक किया जाएगा। इस कार्य में जो भी लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
शैलेंद्र राय, डीपीओ
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जिला अस्पताल में एनआरसी की स्थापना की गई है। इसमें पांच स्टॉफ नर्स, दो कुक, एक केयर टेकर और एक क्लीनर तैनात हैं। इसके अलावा दो बाल रोग विशेषज्ञ भर्ती बच्चों के समुचित इलाज के लिए लगाए गए हैं। एनआरसी की स्थिति अब सुधर रही है। शनिवार को एनआरसी में दो बच्चे भर्ती थे।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस
जिला अस्पताल