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मानसून सत्र करीब, नहीं भरे गए चूहों के बिल

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झाड़ियों व रेनकट से पटा एपी तटबंध।संवाद - फोटो : KUSHINAGAR
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मानसून सत्र करीब, नहीं भरे गए चूहों के बिल
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गंडक नदी की बाढ़ से बचाने के लिए बने हैं नरवाजोत और एपी बांध
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में गंडक नदी की बाढ़ से बचाव के लिए बने एपी और नरवाजोत बांध के गड्ढों को अब तक भरा नहीं गया है। पिछली बरसात में बारिश से हुई बंधे पर कटान और चूहों के बिल जस के तस पड़े हैं। मानसून सत्र 16 जून से शुरू हो जाएगा। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने और बारिश के चलते बंधों को खतरा हो सकता है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से पिपराघाट तक व पिपराघाट जीरो से अहिरौलीदान तक करीब 21 किमी की लंबाई में गंडक नदी बहती है। नदी की धारा को नियंत्रित करने और गांवों को बचाने के उद्देश्य से बाढ़ खंड विभाग की ओर से तटबंधों का निर्माण कराया गया है, लेकिन पिछले कई वर्षों से गंडक नदी का भारी दबाव एपी बांध व नरवाजोत एक्सटेंशन पर बना हुआ है। इसके चलते पिपराघाट के फल टोला, गोवर्धन टोला, नान्हू टोला, अहिरौलीदान के बैरिया टोला, कंचन टोला, चित्तु टोला पूरी तरह और कचहरी टोला, डीह टोला, खैरखुटा आदि गांव आंशिक रूप से नदी की धारा में विलीन हो चुके हैं।
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इस समय बाढ़ खंड तृतीय का सर्वाधिक जोर नरवाजोत में किलोमीटर 1.700, बिनटोली में किलोमीटर 1.480, बाघाचौर में किलोमीटर 12.860 और नोनियापट्टी में किलोमीटर 12.000 से किलोमीटर 12.850 पर स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा कराने पर है। जबकि इस समय बांध का अधिकांश हिस्सा मूंज और नरकट जैसी झाड़ियों से पटा है। लोगों का कहना है कि बांध के किनारे बसे जंगलीपट्टी, जवहीदयाल, बिनटोली, घघवा जगदीश, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, झवनिया टोला, बाघाचौर, नोनियापट्टी, डीह टोला के अधिकांश किसानों का खेत इन बांधों से सटा हुआ है और झाड़ियों व खेतों के कारण हर साल चूहे बांध में बिल बना लेते हैं। भारी बरसात के कारण बांध जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो जाता है। बांध बचाव सुरक्षा तैयारियों में चूहों के बिल और बारिश से हुए कटान को ठीक कराना प्राथमिकता होती है। इस साल यह कार्य अब तक नहीं कराया गया है।
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बांध के किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि 16 जून से गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि होने लगती है। समय रहते चूहों के बिल और बारिश में बने गड्ढों को भरा नहीं गया तो इन्हें नुकसान पहुंच सकता है। मथुरा सिंह, जेपी निषाद, संजय सिंह, डॉ. आरएन यादव, ब्यास कुशवाहा, बृजकिशोर साहनी, प्रदीप सिंह आदि बताते हैं कि इसी तरह के बिल और गड्ढों की वजह से 31 जुलाई 2007 को घघवा जगदीश गांव के सामने एपी बांध टूट गया था। इससे 40 से अधिक गांवों को महीनों तक बाढ़ से तबाही झेलनी पड़ी थी।
बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि मानसून शुरू होने के पहले बांध के सभी संवेदनशील जगहों को सुरक्षित बना लिया जाएगा।
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