हाटा। क्षेत्र के चर्चित सेठी ढाबा से टोकन जारी होने के मामले में जांच तेज हो गई है। इससे प्रशासनिक महकमे हड़कंप मचा है। यह शुरुआत में एक स्थानीय वसूली प्रकरण लग रहा था, वह अब एक संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुका है।
ढाबे से बरामद हुई डायरी, मोबाइल कॉल डिटेल्स और भुगतान का रिकॉर्ड पूरे सिस्टम में चल रहे संरक्षण खेल का पर्दाफाश करना शुरू कर दिया है। हाईवे पर सक्रिय गिरोह की कड़िया पुलिस साक्ष्य के आधार पर जोड़ने में जुटी है।
राज्य कर विभाग की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के बाद जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे नाम तो सामने आ रहे है, लेकिन जांच अधिकारी चुप्पी भी साध रहे हैं। कोई इस मामले में मुंह नहीं खोल रहा है। माना जा रहा है कि मामला केवल ढाबा संचालक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आरटीओ, जीएसटी, पुलिस, परिवहन और टोल प्रबंधन के अफसरों तक उसकी गूंज पहुंच चुकी है।
जांच टीम को ढाबा संचालक के पास से बरामद डायरी और मोबाइल में कई ऐसे मोबाइल नंबर मिले हैं जो सीधे विभागीय कर्मचारियों और अफसरों से जुड़े हैं। इससे यह अंदेशा गहराने लगा है कि टोकन सिस्टम की जड़े काफी गहरी थी और इसकी पहुंच कई दफ्तरों तक थीं। सूत्रों के मुताबिक मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की जांच से पता चला है कि ढाबा संचालक और विभागीय कर्मचारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था। कई नंबर ऐसे हैं जिनसे नियमित बातचीत हुई है। सीडीआर रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि टोकन सिस्टम के जरिए हर दिन लाखों रुपये की वसूली होती थी। यह रकम कहां जाती थी और किन हाथों तक पहुंचती थी, यही अब जांच का सबसे अहम सवाल है कि उच्च स्तर की सहमति के बिना यह नेटवर्क चलाना संभव नहीं था। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारी अब अपने संपर्कों के जरिए बचाव की कवायद में जुट गए हैं। जहां कभी लंबी दूरी की बसें और ट्रक कतार में खड़े रहते थे, अब वहां सन्नाटा पसरा है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि सेठी ढाबा पर अब केवल कुछ स्थानीय वाहन ही दिखाई देते हैं। रात के समय पहले जहां दर्जनों वाहन रुका करते थे। बताया जा रहा है कि प्रकरण की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच चुकी है। शासन ने संबंधित जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।