अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र
कहीं एनएनएम समय से नहीं पहुंच रहीं है तो कहीं भवन जर्जर हो चुके हैं
- जिले में संचालित होते हैं 357 मातृ शिशु एवं कल्याण केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना (कुशीनगर)। जनपद में संचालित मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र लोगों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पा रहे हैं। किसी केंद्र का भवन उचित देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुका है तो कोई केंद्र ऐसे जगह पर है, जहां स्वास्थ्यकर्मियों के लिए समय से पहुंचना मुश्किल है। करीब 81 केंद्र तो ऐसे हैं, जिनका खुद का भवन सही दशा में न होने की वजह से किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। एएनएम के समय से उपलब्ध न रहने पर लोग टीकाकरण या सुरक्षित प्रसव की आस में निजी अस्पताल या जिला अस्पताल की तरफ रुख करने को विवश हैं।
जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में कमी लाने, ग्राम स्तर पर ही टीकाकरण एवं सुरक्षित प्रसव के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी सुझाव के लिए जिले में कुल 357 मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र (एएनएम सेंटर) संचालित किए जाते हैं। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर भवन बनाए गए हैं, जहां गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण सहित स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने के लिए एएनएम तैनात की गई हैं। इनमें ज्यादातर केंद्र देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। सफाई न होने से झाड़ियां उगी हुई हैं। इन केंद्रों के लिए स्थायी और संविदा को लेकर लगभग 600 एएनएम तैनात की गई हैं। इसके बावजूद समय से एएनएम के उपलब्ध न रहने पर प्रसव के लिए पहुंची महिलाओं को निजी अस्पताल जाना पड़ता है, जहां उनके अधिक रुपये खर्च होते हैं।
कहीं-कहीं केंद्र तो ऐसे भी हैं, जहां बिजली आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। यदि समय से एएनएम मौजूद रहें और रात में प्रसव के लिए कोई महिला पहुंच जाए तो टार्च की रोशनी में प्रसव कराना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इन समस्याओं को गंभीरता से न लिए जाने के कारण लोगों को अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। 81 ऐसे केंद्र हैं, जिनके भवन ठीक हाल में न होने की वजह से किराए गए के भवन में संचालित किए जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो कई केंद्र ऐसे स्थानों पर हैं, जो न केवल आबादी से दूर हैं, बल्कि वहां समय से पहुंचना एएनएम के लिए मुश्किल होता है। उन केंद्रों पर रात्रि निवास करना भी सुरक्षित नहीं रहता है। इस वजह से भी एएनएम केंद्र पर जाने से कतराती हैं।
सीएमओ बोले-
जिले में कुल 357 मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र संचालित होते हैं। उन सभी केंद्रों पर एएनएम तैनात हैं। उन सभी को समय से पहुंचकर टीकाकरण करने तथा नियमित ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है, जो भवन जर्जर हो चुके हैं, उनकी मरम्मत कराई जाएगी। इसके अलावा झाड़ियों को साफ कराया जाएगा, ताकि कीड़े-मकौड़ों के चलते स्वास्थ्यकर्मियों अथवा वहां आने वाले मरीजों व उनके परिवारीजनों को कोई नुकसान न हो। अगर एएनएम अपने केंद्र पर नहीं पहुंचती हैं तो ऐसे केंद्रों की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. नरेंद्र प्रसाद गुप्ता, सीएमओ
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र खानूछपरा : दोपहर एक बजे
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के खानूछपरा में वर्ष 1984 में बना मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र जीर्ण-शीर्ण हो गया है। खानूछपरा के ग्रामीण ठाकुर साहनी, विनोद, रामवृक्ष, रमेश, राजू आदि ने बताया कि खानूछपरा, पकड़ियार, पचफेड़ा और लौकरिया सहित चार गांवों की महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख की जिम्मेदारी इस केंद्र की एएनएम पर है, लेकिन यहां लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। इस केंद्र की एएनएम पुष्पा देवी ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह शनिवार के दिन केंद्र पर तथा अन्य दिन गांव में बच्चों व गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। केंद्र पर दो बेड हैं, लेकिन काफी पुराने होने से उपयोग लायक नहीं रह गए हैं। रोशनी बिजली पर निर्भर है। कभी-कभी बिजली न रहने पर रात में टार्च की रोशनी में प्रसव कराना पड़ता है। उपकरण भी बहुत कम हैं। बरसात में छत टपकने लगती है। कक्ष में छाता लगाना पड़ता है। निवर्तमान ग्राम प्रधान की तरफ से रंगाई-पुताई कराई गई है। निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू साहनी का कहना है कि भवन काफी पुराना होने के चलते जर्जर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अनट्रायड फंड से मरम्मत कराई गई है। नए भवन के निर्माण की स्वीकृति मिलेगी तो ग्राम सभा की भूमि प्रबंधन समिति भूमि उपलब्ध कराएगी। प्रभारी चिकित्साधिकारी नेबुआ नौरंगिया डॉ. संतोष गुप्ता का कहना है कि सभी जर्जर एएनएम सेंटर की जगह नए भवन के निर्माण के लिए विभाग को पत्र भेजा जा चुका है। अब शासन द्वारा ही निर्णय होना है।
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र छितौनी खास टोला
समय- दोपहर 1.30 बजे-
खड्डा क्षेत्र में टीकाकरण एवं सुरक्षित प्रसव के लिए छितौनी खास टोला में एएनएम सेंटर स्थापित है। आलम यह है कि इस केंद्र के परिसर में मवेशियों का जमावड़ा रहता है। इसकी शिकायत के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2014 में इस एएनएम सेंटर का निर्माण हुआ था, तब से कुछ ही महीनों तक यह संचालित हुआ। उसके बाद सुविधाएं मिलनी बंद हो गईं। ग्रामीण ओमप्रकाश श्रीवास्तव, राजन कुमार, सुजीत कुमार गौतम, प्रभाकर पांडेय, प्रभुनाथ कुमार, रामकृपाल बताते हैं कि एनमएम सेंटर पर एएनएम तो तैनात हैं, लेकिन वह केंद्र पर नहीं रहती हैं। इससे लोगों को केंद्र का लाभ नहीं मिल पाता। भवन भी जर्जर हो गया है। ऐसी दशा में महिलाओं को सरकार की योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है।
निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि छितौनी छोटेलाल शर्मा का कहना है कि कार्यकाल के दौरान प्रशासक एवं ईओ को एएनएम सेंटर पर अतिक्रमण की सूचना कई बार दी जा चुकी है, लेकिन मवेशियों से निजात नहीं मिली। खड्डा सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभु कहना है कि मामला संज्ञान में है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र पिपरा हुमेल
समय- 2.20 बजे-
सुकरौली क्षेत्र में 50 से अधिक एएनएम सेंटर हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों की जरूरतों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। पिपरा हुमेल गांव के लालजी यादव, छोटेलाल, विकास, राजन, सीमा सहित कई लोगों ने बताया कि यहां के मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र पर किस एएनएम को तैनात किया गया है, उसके बारे में उन्हें पता नहीं है। अधिकारी पहुंचते हैं तो उसे खोलकर साफ-सफाई करा दी जाती है। उसके बाद कोई नहीं आता। ग्रामीण बताते हैं कि करीब ढाई हजार लोगों की आबादी पर यह एएनएम सेंटर स्थापित है, लेकिन देखरेख के अभाव में इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। इस गांव के सत्यकाम पांडेय बताते हैं कि जर्जर भवन के मरम्मत के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुकरौली सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. हेमंत वर्मा ने बताया कि एएनएम सेंटर के बारे में मिली शिकायतों की जांच कराई जाएगी। यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जहां भवन जर्जर हैं, उनके बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। निर्देश मिलने पर मरम्मत कराई जाएगी।