तिनका-तिनका जोड़कर बनाया, बाढ़ ने किया बर्बाद
बाढ़ का पानी घटने पर स्थिति संभली तो अब जलजनित बीमारियों का डर
शुक्रवार को 24 घंटे में डिस्चार्ज बढ़कर दो लाख 600 क्यूसेक हुआ
गंडक नदी चेतावनी बिंदु 95 सेंटीमीटर से 64 मीटर ऊपर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। गंडक नदी के उफनाने से खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्रों के नौ गांवों में घुसा बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन उससे उपजी समस्याएं अब लोगों की चिंता का सबब बन गई हैं। तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए फूस के अनेक घर ढह गए हैं, जिन्हें बाढ़ प्रभावित लोग अब सहेजने की जुगत में लगे हैं। अनाज रखने के बखार पानी में भीगे गए। बेटियों की शादी के लिए रखे गए कपड़े, अनाज और अन्य सामान पानी में खराब हो गए।
निरंतर जलभराव होने की वजह से अब जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग भयभीत हैं। बृहस्पतिवार को पूर्व सांसद बालेश्वर यादव ने बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर उनका दर्द देखा था और समस्याएं सुनी थीं। पूर्व सांसद ने शुक्रवार को बताया कि यदि उनकी पार्टी की सरकार प्रदेश में बनती है तो वह बाढ़ प्रभावित इन गांवों की समस्याओं को दूर कराने के लिए और सड़कों को ऊंचा कराने की पूरी कोशिश करेंगे। शुक्रवार को दोपहर दो बजे 24 घंटे में गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज दो लाख 600 क्यूसेक हो गया। गंडक नदी चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 64 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। गंडक नदी का रुख शुक्रवार को तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नरवाजोत बांध की तरफ हो गया है। नदी इस तरफ कटान करने लगी है। इस बांध की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक ठोकर पर तेजी से कटान होने की वजह से पास के गांवों में रहने वाले लोग भयभीत हैं।
सोहगीबरवा में सड़क लगभग 50 मीटर बही
बाढ़ प्रभावित लोग जिंदगी को पटरी पर लाने में जुटे
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज शुक्रवार को दोपहर दो बजे दो लाख क्यूसेक को पार कर गया। जलस्तर में कमी के चलते बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात में सुधार आ रहा है। हालांकि नदी के अचानक रुख बदलने के इतिहास को देखते हुए लोग अभी भी आशंकित हैं। खड्डा तहसील क्षेत्र के शिवपुर, हरिहर, नरायनपुर और महराजगंज के निचलौल तहसील के सोहगीबरवा गांव में जाने वाली सड़क लगभग 50 मीटर बह गई है। जगह-जगह सड़क टूटने व पुलिया बह जाने से आवागमन में व्यवधान आ रहा है।
बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में छोड़े गए पानी का डिस्चार्ज 1,80,400 क्यूसेक था, जो 24 घंटे बाद शुक्रवार को दोपहर दो बजे बढ़कर 2,00,600 क्यूसेक पर पहुंच गया। उस समय भैंसहां गेजस्थल पर नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 64 सेंटीमीटर ऊपर 95.64 मीटर था। यह खतरे के निशान 96.00 मीटर से 36 सेंटीमीटर ही नीचे है। बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा गांव से पानी निकल गया है। इसके बाद अब घरों में कीचड़ हो गया है, जिसे साफ कर बाढ़ प्रभावित लोग जिंदगी को पटरी पर लाने में जुटे हैं। मरचहवा दक्षिण टोला व पूरब टोला तथा बसंतपुर गांव में पहुंचने के लिए दो जगह नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बाढ़ के सैलाब के सामने हौसलों का बांध
नई उम्मीद के साथ जिंदगी को पटरी पर लाने की कर रही जद्दोजहद
घरों में पसरे कीचड़ को साफ कर गृहस्थी संभाल रहीं महिलाएं
विद्याधर तिवारी
खड्डा। बसंतपुर गांव से पानी निकलने की सूचना पर शुक्रवार को महिलाएं बाढ़ शरणालयों से निकलकर अपने घरों में पहुंचीं। वहां की दशा देखकर कुछ महिलाएं रोने लगीं। कुछ देर बाद कीचड़ साफ कर दोबारा जिंदगी पटरी पर लाने की जद्दोजहद में जुट गईं। पूरे साल तिनका-तिनका जोड़कर गृहस्थी बसाने वाली महिलाओं के सपनों पर बाढ़ हर साल पानी फेर देता है। खड्डा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित बसंतपुर गांव की सूरसती देवी पानी बढ़ने पर घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चली गई थीं। शुक्रवार को अपनी झोपड़ी के फूस के दरवाजे पर पहुंची तो नजारा देखकर दु:खी हो गईं। बरसात के पहले जो घर उनके परिवार को सुकून देता था, वहां कीचड़ का अंबार था। बदबू से सांस लेना मुश्किल था। घर का कोई कोना ऐसा नहीं था, जहां बाढ़ ने ने कहर न ढाया हो। कुछ देर घर देखने के बाद साड़ी का पल्लू बांधकर कीचड़ साफ करने में जुट गईं। उसकी चिंता यह है कि अगर घर सही नहीं होगा, तो बच्चे और परिवार के अन्य लोग कहां रहेंगे। यह पीड़ा केवल सूरसती की नहीं है। ऐसे हालात गांव की गायत्री, कुसुमकली, नगेसरी, सीमा, उर्मिला, चंदा, अमेरूनेसा, सलहंती आदि की भी है। यही दशा बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों के अधिकांश परिवारों की है। बाढ़ प्रभावित महिलाओं को नित्य क्रिया से लेकर, सोने, खाने, नहाने, बीमारी आदि से समझौता करना पड़ता है। उन्हें अपने से ज्यादा परिवार की चिंता रहती है। अब बाढ़ कम होने के बाद एकबार फिर गृहस्थी बसाने में जुट तो गई हैं, लेकिन क्या पता अगले साल क्या होगा। फिर भी पूर्व के वर्षों की तरह इन महिलाओं ने शायद हार मानना सीखा ही नहीं है।
गंडक नदी पर बना ठोकर क्षतिग्रस्त
खड्डा। हनुमानगंज गांव के पास छितौनी तटबंध पर गंडक का दबाव बढ़ने से ठोकर का आधा हिस्सा कट गया है। कटान होने से लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों ने सही से बचाव कार्य नहीं करने पर बाढ़ खंड के प्रति नाराजगी जताई है।
गंडक नदी का डिस्चार्ज कम होने के बावजूद छितौनी तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। हनुमानगंज गांव के शिवमंदिर के सामने तटबंध के स्पर (ठोकर) के पास नदी कटान करते हुए बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दी है। ठोकर के साथ ही तटबंध की तरफ नदी ने दबाव बना लिया है। बांध और नदी के बीच जमीन पर लोग फसल बोए हैं। उसे नदी काट रही है। ग्राम प्रधान जनार्दन, हरिशंकर सिंह, रामबेलास, जीउत, सुदर्शन, प्रीतम आदि ने बाढ़ खंड पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सही से कार्य नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन कुमार ने बताया कि बचाव कार्य शुरू कराया गया है। लापरवाही की बात सही नहीं है।
बाढ़ के प्रकोप ने हसरतों पर पानी फेरा
पानी घटने पर घर लौटने के बाद नई चुनौती ने बढ़ा दी है चिंता
दिवाकर कुमार
छितौनी। बीते दिनों गंडक नदी की बाढ़ से घरों में पानी भरने की वजह से सुरक्षित स्थानों पर गए अनेक गांवों के लोग शुक्रवार को अपने घरों को लौटे। घरों का दृश्य देखकर उनकी चिंता बढ़ गई। बेटियों की शादी के लिए जुटाकर रखे गए सामान पानी में भीगने से खराब हो रहे थे। अनाज भी भीगकर खराब हो गया था। इसी तरह अन्य कई सामान भी भीगने से खराब हो गए। बाढ़ प्रभावित इन गांवों के अनेक घरों में शादी है, लेकिन घर में खाने के लाले पड़े हैं। ऐसे में उन्हें यह भी चिंता सता रही है कि शादी के लिए इंतजाम कैसे करेंगे।
महदेवा गांव के लोग पहले तो बाढ़ की वजह से एक पखवारे पहले अपने फसलों और खेतों को खो बैठे। इनके खेत नदी में समा गए। अब ग्रामीणों के पास जो घर में अनाज रखे थे, वही जीवन यापन के लिए बचा था। लेकिन अचानक आई बाढ़ ने बर्बाद कर दिया। जिससे उन बाढ़ पीड़ितों को बेटियों की शादी की चिंता लग गई है। इस गांव के बैजनाथ गोंड की दिव्यांग बिटिया पिंकी की शादी फरवरी में रामकोला थानाक्षेत्र में तय की है, लेकिन बाढ़ से घर में रखे सारे सामान बर्बाद हो चुके हैं। इससे बिटिया की शादी को लेकर चिंतित हैं। शुक्रवार को अपने घर के आगे परिवार के साथ बैठे थे। बैजनाथ ने बताया कि दो एकड़ खेत में गन्ना व धान की फसल थी। आशा थी कि गन्ना को बेचकर बिटिया की शादी करेंगे, लेकिन वह आशा भी टूट गई। क्योंकि बाढ़ में फसल सहित खेत बह गया और घर में रखे अनाज भी बर्बाद हो गया। इसी तरह गांव के हरिद्वार गोंड, सुनीता, मोतीलाल निषाद, गौरी, नंदू, भीमबली, महंत आदि के घरों में भी अगले लग्न में शादी है। लेकिन बाढ़ व कटान से सब कुछ बर्बाद हो चुका है। घर में कुछ नहीं बचा है। इन सबकी चिंता यही है कि आखिर शादी कैसे होगी, जब घर में कुछ नहीं बचा है। इन्हें अब सरकारी मदद का उम्मीद है।
गंडक नदी ने शुरू की कटान
कई लोगों की झोपड़ियां नदी में विलीन
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। पिपराघाट के तेजू टोला के सामने नरवाजोत बांध के किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर की शुक्रवार को गंडक नदी ने अचानक कटान शुरू दी। इससे पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई है। ठोकर के किनारे स्थित कई लोगों की झोपड़ियां तक नदी में विलीन हो गईं और शेष लोग अपने सामानों को हटाने में जुट गए हैं। इसकी सूचना मिलते ही बाढ़ खंड के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू करा दिया। गंडक नदी अब सेवरही क्षेत्र में बांध व ठोकरों को निशाना बनाना शुरू कर दी है। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ने लगी है। क्योंकि शुक्रवार को सुबह पिपराघाट के तेजू टोला के सामने नरवाजोत बांध के किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर पर गंडक नदी का भारी दबाव बन जाने के बाद नदी ने कटान करना शुरू कर दी। कटान इतना तेज था कि देखते ही देखते जयकिशुन, प्रताप, हरिलाल, बेचू, छोटेलाल, दिलीप, राजकुमार सहित कई लोगों की झोपड़ियां नदी में विलीन हो गईं। वहीं जीतन, सत्येंद्र, रामरतन, उपेंद्र, अनिरुद्ध, वीरेश, शिवरतन सहित अन्य लोगों ने भी कटान के भय से अपने सामानों को हटाना शुरू कर दिया। ठोकर पर कटान की सूचना मिलते ही बाढ़ खंड के जेई राकेश कुमार और राजेश सिंह मौके पर पहुंच गए। बाढ़ खंड के अभियंताओं की ओर से वहां बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। लोगों का कहना है कि पिछले साल भी गंडक नदी के दबाव के चलते नरवाजोत के मुख्य बांध पर कटान का खतरा हो गया था, जिसे किसी तरह कई दिनों के फ्लड फाइटिंग के जरिए बचाया जा सका था। इसी के चलते प्रदेश सरकार ने इस साल इस बांध को सुरक्षित करने के उद्देश्य से लगभग 40 करोड़ की चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उनका कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। लेकिन बांध के जिस हिस्से में बचाव कार्य नहीं हुआ है, उन हिस्सों में अब नदी का कटान होने लगा है। बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान को नियंत्रित करने को लेकर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। कटान को शीघ्र नियंत्रित कर लिया जाएगा।