पडरौना। मध्य एशिया में संघर्ष के 37 दिन बीत जाने के बाद रसोई गैस वितरण व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। उपभोक्ता एजेंसी से गोदाम तक सिलिंडर के लिए चक्कर काट रहे हैं, पर उनकी कोई सुनवाई नहीं है।
जिले में विभिन्न कंपनियों के शहरी सहित ग्रामीण इलाकों में 97 गैस एजेंसियां संचालित हैं। जहां नौ लाख से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं। लेकिन वर्ष 2107 से जब गैस की आपूर्ति बढ़ी तो उपभोक्ता गैस सिलिंडर को लेकर बेपरवाह हो गए। इसकी प्रमुख वजह यह रही कि एजेंसी की होम डिलीवरी की गाड़ी शहर से देहात तक दरवाजे तक पहुंचकर गैस कीआपूर्ति करती रही। अचानक से जब ईरान, इस्राइल व अमेरिका के बीच बीते 28 फरवरी को संघर्ष शुरू हुआ तो गैस की किल्लत आरंभ हो गई।
गैस की किल्लत को लेकर उपभोक्ताओं की दुश्वारी के साथ एजेंसी संचालकों की भी परेशानी बढ़ी है। गैस एजेंसी संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले से गैस की आपूर्ति कम हुई है। पहले जहां महीने में 16 से 17 गाड़ियां आती थी, अब घटकर 10-12 गाड़ी हो गई है। जबकि उपभोक्ताओं की बुकिंग आपूर्ति के अपेक्षा अधिक लगातार एक महीने से बनी हुई है, इसलिए गैप को पूरा करने में मुश्किल हो रही है। आए दिन उपभोक्ताओं से विवाद की हालात सामने आ रही है।
वहीं,उपभोक्ता भी भोर से गैस सिलिंडर के लिए दौड़ लगाना शुरू कर दे रहे हैं। इसके बावजूद यह तय नहीं है कि उन्हें गैस मिल ही जाएगी। होम डिलीवरी का फरमान भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं दिला पा रहा है।
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गैस की किल्लत दूर करने के लिए जिला प्रशासन लगातार माॅनीटरिंग कर रहा है। आपूर्ति को लेकर हो रही दिक्कतों को दूर कराने के लिए जिम्मेदारों को मौके पर भेजकर सुलझाया जा रहा है। पहले से व्यवस्था में सुधार हुआ है। उम्मीद है कि उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल जाएगी। -कृष्ण गोपाल पांडेय,डीएसओ,कुशीनगर
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उपभोक्ताओं के सापेक्ष गैस सिलिंडर की आपूर्ति रही कम
पिपरा कनक। क्षेत्र के महुअवां में रविवार सुबह रसोई गैस सिलिंडर वितरण किए जाने की सूचना के बाद उपभोक्ताओं की भीड़ जुट गई, गाड़ी आई तो मौजूद उपभोक्ताओं के सापेक्ष गैस सिलिंडर कम पड़ गए। इसकी वजह से आधे से अधिक उपभोक्ता बिना गैस सिलिंडर के लौट गए।
क्षेत्र के बैरगही, काजीपुर, सुलतानपुर, अमवां महंथ, बोदा टोला, पटहेरवा आदि गावों के उपभोक्ता गैस सिलिंडर के लिए महुअवां में पहुंचे। वहां मौजूद राम सकल तिवारी, अखिलेश तिवारी, मनोज सिंह, रुस्तम अंसारी, पाले खान, मनोज तिवारी आदि उपभोक्ताओं का कहना था कि ईरान-अमेरिका व इस्राइल के बीच संघर्ष शुरू हुए एक महीने से अधिक होने जा रहा है। इसके बावजूद गैस की किल्लत दूर नहीं हो पाई है। हालात यह हैं कि उपभोक्ता बुकिंग करवाकर रिफिल के लिए होम डिलीवरी की गाड़ी का इंतजार कर रहे हैं। पिपरा कनक ग्राम प्रधान मजीबुल होदा सहित खुर्शीद आलम, नसीमअख्तर, आनंद कुमार, फैयाज अहमद, सेराज अहमद, जुहैर रजा, सैफ अली ने घर-घर तक सिलिंडर पहुंचाए जाने की मांग की है। संवाद
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फोटो है।
- गैस की किल्लत, मिट्टी निर्मित चूल्हे पर बनाएंगी रसोई
सुकरौली। क्षेत्र में गैस सिलिंडर की किल्लत बनी हुई है। प्रशासन के गैस भरपूर होने के दावे धरातल पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। हालात यह है कि गैस किल्लत को देखते हुए गांव की महिलाएं मिट्टी से पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाने के लिए बढ़ रही हैं।
उपभोक्ता अशोक कुमार,गंगासागर, धीरज कुमार, संतोष शर्मा, गुड्डू का कहना है कि गैस की सुचारु ढंग से आपूर्ति नहीं होने से रसोई का पूरा बजट ही बिगड़ गया है। प्रशासन की ओर से होम डिलीवरी और आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए गठित टीम का भी कोई सार्थक असर नहीं दिखाई दे रहा है। संवाद