कुशीनगर। डीएम की सख्ती के बाद अवैध तरीके से संचालित करने वाले अस्पताल संचालकों में खलबली मची है। सीएमओ कार्यालय से इस खेल पर बहुत जल्द विराम लग जाएगा। इसको लेकर खींचतान बढ़ गई है। नेबुआ नौरंगिया सीएचसी पर चार, हाटा सीएचसी पर चार, तमकुहीराज सीएचसी पर दो अस्पतालों की सूची लगाई गई है जो वैध है। संचालित होने वाले कई ऐसे अस्पताल हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन हुआ है, लेकिन अभी तक तय समय के अंदर इनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सका है। हालाकि नेबुआ नौरंगिया, हाटा और तमकुहीराज में 50 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। ऐसे अस्पतालों पर शिकंजा कसने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार जुटे हैं।
अवैध अस्पतालों पर शिकंजा कसने के लिए शासन की ओर से नियम में बदलाव किया गया है। इसमें ऑनलाइन आवेदन करने वाले अस्पतालों के डॉक्टर, अस्पताल का मौका देखने के बाद नोडल अफसर रिपोर्ट देंगे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होगी। अभी तक करीब 150 निजी अस्पताल, डेंटल अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। करीब 140 आवेदन पेंडिंग में हैं।
सीएमओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन के लिए जो भी आवेदन आए थे, उसकी जांच कर 90 दिन के अंदर निस्तारण करना था, लेकिन सीएमओ कार्यालय की ओर से तय समय में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। इसकी वजह से अभी तक 140 अस्पतालों का आवेदन पेंडिंग में हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाले अस्पताल संचालक सीएमओ कार्यालय का अब चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व में निजी अस्पतालों के नोडल रहे एक लेवल टू के डॉक्टर और मलेरिया इंस्पेक्टर के पास भी अस्पताल संचालक पहुंच रहे हैं, क्योंकि जो अस्पताल इनके संरक्षण में संचालित होता था, उसका रजिस्ट्रेशन कराने के लिए दोनों लोग जिम्मा लिए थे। इसके लिए अब लोग इनके पास पहुंच रहे हैं। नेबुआ नौरंगिया न्यू लाइफ केयर हॉस्पिटल के अलावा दो अस्पतालों को सील कर दिया गया है। इसके अलावा 10 से अधिक अस्पताल अभी भी संचालित बिना रजिस्ट्रेशन के हो रहे हैं।