पडरौना। विधि-जगत में अपनी लेखनी और शोध के जरिए अलग पहचान बनाने वाले कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र निवासी प्रोफेसर अशोक कुमार राय ने एक और राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने उनकी पुस्तक ‘विधिक शिक्षा एवं विधिक शोध पद्धति’ को वर्ष 2025 के राजभाषा गौरव पुरस्कार के लिए चुना है। पुस्तक का चयन ‘विधि एवं न्यायालयिक विज्ञान, पुलिस, अपराधशास्त्र अनुसंधान और पुलिस प्रशासन’ श्रेणी में किया गया है। इस उपलब्धि से अयोध्या के साथ कुशीनगर के शिक्षा जगत में भी खुशी है।
प्रोफेसर अशोक वर्तमान में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के विधि संकायाध्यक्ष हैं। जुलाई 2020 से वे इस दायित्व का निर्वहन करने के साथ ही विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्य भी हैं। इससे पहले सितंबर 2001 से वह सेंट बिनोवा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देवरिया के विधि विभाग में प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में कामता प्रसाद सुंदरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या के विधि विभागाध्यक्ष के रूप में भी शैक्षणिक दायित्व निभा रहे हैं। प्रोफेसर अशोक मूल रूप से कुशीनगर की तमकुहीराज तहसील के माधोपुर बुजुर्ग गांव के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय ध्रुव प्रसाद राय नेहरू इंटर कॉलेज, तरयासुजान में हिंदी के प्रवक्ता थे। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विधि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। उन्होंने एलएलबी परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल कर गोरखपुर विश्वविद्यालय से विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्रथम श्रेणी में एलएलएम किया। एलएलएम के दौरान उन्हें यूजीसी मेरिट स्कॉलरशिप भी मिली। उन्होंने प्रथम प्रयास में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की और उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की विधि प्राध्यापक परीक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने सामयिक विधि विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की।
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26 पुस्तकों के लेखक, 130 से अधिक शोधपत्र
पडरौना। प्रो. अशोक कुमार राय की अब तक 26 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी पुस्तक ‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन-एक परिचय’ के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर नामित राष्ट्रीय पुरस्कार/सम्मान-2018 प्रदान किया गया। वहीं ‘विधिशास्त्र के सिद्धांत’ पुस्तक के लिए भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से डॉ. राजेंद्र प्रसाद विधि राष्ट्रीय पुरस्कार वर्ष 2021 प्रदान किया गया। उन्हें अब तक करीब 12 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। उनके 130 से अधिक शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। 80 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भी वह प्रतिभाग कर चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में मुलायम सिंह यादव शिक्षक सम्मान-2020 भी मिला है। इसके अलावा विधि व्यास सम्मान, विधि भूषण पुरस्कार-2022, डॉ. शिवबरन मौर्या साहित्य भूषण पुरस्कार-2022, नेशनल रिसर्च अवार्ड-2022 और इंटरनेशनल रिसर्च अवार्ड-2024 सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। संवाद
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