कुशीनगर। शहर से लेकर गांव तक अवैध निजी अस्पतालों के फैले जाल को तोड़ने में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ढिलाई बरत रहे हैं। यही वजह है कि अधिकतर अस्पतालों में अभी भी ऑन काल डॉक्टरों का खेल जारी है। सीएमओ ने 120 से अधिक निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर कमियों को दूर कर रजिस्ट्रेशन कराने का मौका दिया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई यह अंतिम नोटिस है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का दावा सीएमओ की ओर से किया जा रहा है। हाल ही जेडी की ओर से जांच में आई टीम को भी मानक के अनुसार रजिस्टर्ड अस्पताल संचालित होते हुए नहीं मिले, इसके अलावा पूर्व में भी अस्पतालों का किए गए रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा मिला था। कसया के एक अवैध अस्पताल संचालक पर केस भी दर्ज कराया गया था।
शहर में अभी भी कई ऐसे निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। आवेदन तो ऑनलाइन पोर्टल पर किए थे, लेकिन मानक पूरा नहीं करने के कारण उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया है, बावजूद ऐसे अस्पताल बेखौफ तरीके से चल रहे हैं और मरीजों की सेहत के साथ इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है।
करीब छह माह पूर्व एक स्टिंग ऑपरेशन में जिले के छह अस्पतालों में मरीजों के खरीद फरोख्त करने का खुलासा हुआ था। इसमें शहर के एक अस्पताल का रजिस्ट्रेशन जिस डॉक्टर के नाम पर किया गया था, गोरखपुर के रहने वाले वे डॉक्टर कभी पडरौना आए ही नहीं थे।
सीएमओ कार्यालय से ऐसे भी कारनामा किया गया था, जांच में यह मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की खूब किरकिरी हुई थी। इसके अलावा कसया में दीनदयाल हॉस्पिटल अवैध तरीके से संचालित हो रहा था। इसके संचालित के खिलाफ कसया सीएचसी के प्रभारी ने केस दर्ज कराया था। तीन दिन पूर्व गोरखपुर से जेडी की आई टीम में शहर के तीन अस्पतालों की जांच की। इसमें तीनों अस्पताल मानक के अनुसार नहीं मिले। तीनों में ऑनकाल डॉक्टर बुलाने की बात संचालकों ने कही। अभी जिले में किए गए आवेदन में 80 से अधिक निजी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरा किया जा चुका है।
सीएमओ की 120 से अधिक निजी अस्पतालों को नोटिस दिया जा रहा है। इसमें 15 दिन के अंदर मानक को पूरा कर रजिस्ट्रेशन कराने का समय दिया गया है, इतने दिन में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले अस्पतालों को बंद कराया जाएगा। इस सूची में कई सफेदपोशों का अस्पताल हैं, जो अपने प्रभाव के बल पर संचालित कर रहे हैं। इस पर शिकंजा कसने के लिए सीएमओ डीएम से संपर्क कर आगे की योजना बनाएंगे।