पडरौना (कुशीनगर)। जिले का रिजवान अहमद फिर अपनी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। करीब एक दशक पहले आतंकी कनेक्शन के आरोप में जेल जा चुके रिजवान को शनिवार रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने पकड़ा और ट्रांजिट रिमांड पर उसे अपने साथ ले गई। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के छावनी के राईनी मोहल्ले में हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिल रहे थे कि रिजवान जेल से छूटने के बाद दोबारा संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त हो गया है। जांच एजेंसियां रिजवान के डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही हैं।
सूत्रों नेबताया कि टीम ने मौके से उसका मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन उपकरणों में संदिग्ध संपर्क होने के प्रमाण मिलने की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रिजवान के खिलाफ 4/5 विस्फोटक अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। उसमें रिजवान वांछित था। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि रिजवान अक्सर इंटरनेशनल कॉल किया करता है। रिजवान के जेल से बाहर आने के बाद नया नेटवर्क तैयार किए जाने के तथ्य खुफिया एजेंसियों को मिल रहे थे। वह गुप्त रूप से फिर से सक्रिय हो गया था और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा था। जेल से बाहर आने के बाद आईएसआईएस से जुड़े पुराने संपर्कों को दोबारा जीवित करने की जुगत में था।
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फेसबुक से आया आईएसआईएस आतंकियों के संपर्क में
पडरौना। वर्ष 2016 में बुद्ध इंटर कॉलेज का छात्र रिजवान अहमद उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब उसके तार सीरिया में बैठे आईएसआईएस आतंकियों से जुड़े पाए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, फेसबुक पर उसकी पहचान सीरिया के कुख्यात आतंकी यूसुफ से हुई। इसके बाद दोनों के बीच ई-मेल और ह्वाट्सएप के जरिए लगातार संपर्क बना रहा। इसी दौरान रिजवान आतंकी नेटवर्क के प्रभाव में आ गया और देश के भीतर उनके लिए जमीन तैयार करने में जुट गया।
‘ऑपरेशन सात कलश’ से जुड़ाव : एनआईए और एटीएस की जांच में सामने आया कि आतंकियों ने ‘ऑपरेशन सात कलश’ के तहत देश के सात प्रमुख स्थानों पर बम धमाकों की साजिश रची थी। इस नेटवर्क में रिजवान अहम कड़ी था। वह यूपी के साथ-साथ हैदराबाद, पुणे और बेंगलुरु में संदिग्धों से संपर्क बनाए हुए था। जांच में यह भी सामने आया कि साजिश को अंजाम देने के लिए उसे एक लाख रुपये नकद दिए गए थे।
सीआईए की सूचना से खुला मामला : सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की सतर्कता से इस नेटवर्क का पता चला। डिजिटल संचार की जानकारी भारतीय एजेंसियों को मिलने के बाद 22 जनवरी 2016 को अभियान चलाकर रिजवान सहित 14 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। उस समय रिजवान अपने परिवार के साथ कुशीनगर नगर पालिका के वार्ड-24 सुभाषनगर में किराए के मकान में रहता था। एटीएस और पुलिस ने उसे वहीं से पकड़ा था। उसका मूल निवास कसया थाना क्षेत्र के सिसवा मठिया गांव में है। उसके पिता निजामुद्दीन लेखपाल पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जेल से छूटने के बाद दुकान की आड़ : सजा पूरी कर 2023 में जेल से बाहर आने के बाद रिजवान ने पडरौना के छावनी क्षेत्र में किराने की दुकान खोल ली। पुलिस के अनुसार, वह सामान्य दुकानदार की तरह व्यवहार करता था ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि दुकान की आड़ में वह युवाओं से संपर्क बनाए रखता था और डिजिटल माध्यमों से पुराने नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पिता बोले - गलती की है तो सजा मिले : रिजवान के पिता ने कहा, हम देश से प्रेम करने वाले लोग हैं। अगर बेटे ने गलती की है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में अधिक जानकारी होने से इन्कार किया।
प्रदेश में दर्ज नहीं कोई मुकदमा : पुलिस के अनुसार, रिजवान के खिलाफ उत्तर प्रदेश के किसी भी थाने में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है। 2016 में गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र एटीएस उसे अपने साथ ले गई थी, जहां कोर्ट ने उसे सजा सुनाई। सजा पूरी होने के बाद वह 2023 में वापस पडरौना आ गया।