पडरौना। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सूबे के 35 मेडिकल कॉलेजों की जांच होनी है। इसमें कुशीनगर भी शामिल है। यहां की चिकित्सा एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़े 28 बिंदुओं पर पड़ताल करने के लिए दो सदस्यीय चिकित्सा शिक्षकों की टीम जल्द ही पहुंचेगी।
मगर, यहां टीम को दिखाने के लिए चिकित्सा सेवा से जुड़ी कोई हाईटेक सुविधा नहीं है। मेडिकल कॉलेज के पास न तो ट्राॅमा सेंटर हैं और न ही वेंटीलेटर की सुविधा है। एमबीबीएस छात्रों की सुचारू पढ़ाई के लिए कई फैकल्टी में प्रोफेसरों की भी कमी है।
ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन पशोपेश में है और अब व्यवस्था को दुरुस्त करने में लग गया है।
मेडिकल कॉलेज करीब दो साल से संचालित हो रहा है। इस साल सौ चिकित्सकों का पहले साल की पढ़ाई पूरी हो गई है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां पर केवल इमरजेंसी और मरीजों को भर्ती करने के लिए जनरल वार्ड से इतर कोई सुविधा नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में ट्राॅमा सेंटर की स्थापना नहीं हो सकी है। इसके लिए कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसे चिकित्सक और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध नहीं है। आईसीयू वार्ड हैं जहां गंभीर मरीजों का इलाज होता है। अत्याधुनिक जांच का भी कोई इंतजाम नहीं है।
सिर्फ अल्ट्रासाउंड और ब्लड जांच के अलावा सीटी स्कैन की ही व्यवस्था है। एमआरआई, एंजियोग्राफी, इंडोस्कोपी, नाक-कान-गला के लिए ओटोस्कोपिक जैसे अत्याधुनिक जांच की व्यवस्था अभी तक नहीं बन पाई है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा में भी तमाम कमियां बरकरार है।
इधर, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चिकित्सा शिक्षा अनुभाग के संयुक्त सचिव स्तर से जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन उपलब्ध व्यवस्था को ही सुव्यवस्थित करने में जुटा हुआ है।